गाँव से शहर के वार्ड बने क्षेत्रों का विकास किसके भरोसे? जिम्मेदार जवाब दें : एडवोकेट अजय शर्मा

- शहर से नवसमावेशित क्षेत्रों तक जनजागरण अभियान चलाएगी कांग्रेस, 29 जुलाई को होगा ‘नरक परिषद का घेराव’
ब्यावर, 21 जुलाई 2026(केकड़ी पत्रिका/तरन दीप सिंह) ब्यावर को जिला बनाए जाने के बाद शहर के सुनियोजित और समग्र विकास को लेकर जनता ने जो उम्मीदें की थीं, वे भाजपा शासन में पूरी होती नजर नहीं आ रही हैं। शहर के पुराने वार्डों में ही सड़क, सफाई, रोड लाइट, जल निकासी और अन्य बुनियादी नागरिक सुविधाएँ बदहाल हैं। ऐसे में परिसीमन के बाद नगर परिषद सीमा में शामिल किए गए गाँवों और पेराफेरी क्षेत्रों के विकास तथा नागरिक सुविधाओं को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।इन्हीं जनसमस्याओं को लेकर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी, ब्यावर द्वारा व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। अभियान के तहत शहर के वार्डों, मोहल्लों, कॉलोनियों तथा नवसमावेशित क्षेत्रों में जनसंपर्क कर नागरिकों की समस्याएँ एकत्र की जाएँगी। इसी क्रम में 29 जुलाई 2026 (बुधवार) प्रातः 10:30 बजे नगर परिषद, ब्यावर के समक्ष “जनआक्रोश प्रदर्शन एवं नरक परिषद का घेराव” किया जाएगा।
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी, ब्यावर के अध्यक्ष एडवोकेट अजय शर्मा ने कहा कि भाजपा के लंबे शासनकाल में नगर परिषद जनसेवा का प्रभावी केंद्र बनने के बजाय भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और जनसमस्याओं की अनदेखी का प्रतीक बन गई है। नगर परिषद की वर्तमान स्थिति भाजपा सरकार की प्रशासनिक विफलता का स्पष्ट उदाहरण है।उन्होंने कहा कि विधायक श्री शंकर सिंह रावत के लगभग साढ़े सत्रह वर्षों के कार्यकाल के बावजूद ब्यावर आज भी बुनियादी नागरिक समस्याओं से जूझ रहा है। टूटी और गड्ढों से भरी सड़कें, चरमराई सफाई व्यवस्था, जाम नालियाँ, अव्यवस्थित सीवरेज, बंद स्ट्रीट लाइटें, जलभराव तथा आवारा पशुओं की समस्या से आमजन परेशान है।एडवोकेट शर्मा ने कहा, “आम जनता त्रस्त है और भाजपा नेता मस्त हैं।” उन्होंने कहा कि विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच यदि नागरिकों को रोजमर्रा की मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़े तो जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को इसका जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि परिसीमन के बाद नगर परिषद में शामिल किए गए गाँवों और पेराफेरी क्षेत्रों की स्थिति और अधिक चिंताजनक है। जब नगर परिषद पुराने शहरी क्षेत्रों में ही सड़क, सफाई, प्रकाश और जल निकासी जैसी सुविधाएँ सुचारु रूप से उपलब्ध नहीं करा पा रही है, तो नए शामिल क्षेत्रों का विकास आखिर किसके भरोसे होगा? केवल प्रशासनिक सीमा बदलने से विकास नहीं होता, बल्कि उसके अनुरूप बजट, आधारभूत ढाँचे और नागरिक सुविधाओं की भी आवश्यकता होती है।एडवोकेट शर्मा ने बताया कि कांग्रेस कार्यकर्ता आगामी दिनों में शहर के सभी वार्डों, मोहल्लों, कॉलोनियों तथा नवसमावेशित क्षेत्रों में घर-घर जनसंपर्क करेंगे। स्थानीय नागरिकों से उनकी समस्याएँ जानकर उन्हें जनजागरण अभियान से जोड़ा जाएगा तथा 29 जुलाई के जनआक्रोश प्रदर्शन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने का आह्वान किया जाएगा।उ
न्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस का यह अभियान केवल राजनीतिक विरोध तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य आमजन की वास्तविक समस्याओं को सामने लाना, नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन की जवाबदेही सुनिश्चित करना है।नवसमावेशित क्षेत्रों के जनप्रतिनिधियों से भी सहयोग की अपीलब्लॉक कांग्रेस कमेटी, ब्यावर ने पेराफेरी पंचायतों एवं परिसीमन के बाद नगर परिषद क्षेत्र में शामिल हुए इलाकों के वर्तमान एवं पूर्व जनप्रतिनिधियों से भी आग्रह किया है कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर अपने क्षेत्र की जनता की समस्याओं को उठाने के लिए इस जनआक्रोश प्रदर्शन में सहभागी बनें।एडवोकेट शर्मा ने कहा कि यदि किसी क्षेत्र में सड़क, सफाई, रोड लाइट, जल निकासी अथवा नगर परिषद से संबंधित अन्य समस्याएँ हैं, तो नागरिक एवं जनप्रतिनिधि अपनी शिकायतें कांग्रेस के समक्ष रख सकते हैं। प्राप्त समस्याओं को संकलित कर आंदोलन के माध्यम से प्रमुखता से उठाया जाएगा तथा जिम्मेदार प्रशासन से जवाब माँगा जाएगा। समस्याओं की जानकारी मोबाइल नंबर 9414009101 पर भी दी जा सकती है।
उन्होंने ब्यावर शहर एवं नवसमावेशित क्षेत्रों के नागरिकों, सामाजिक संगठनों, व्यापारियों, युवाओं, महिलाओं और जनप्रतिनिधियों से 29 जुलाई 2026 (बुधवार) प्रातः 10:30 बजे नगर परिषद, ब्यावर पहुँचकर “जनआक्रोश प्रदर्शन एवं नरक परिषद का घेराव” में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील की।अंत में एडवोकेट शर्मा ने कहा, “अब सवाल केवल किसी एक सड़क, नाली या वार्ड का नहीं, बल्कि पूरे ब्यावर के भविष्य और नागरिकों के अधिकारों का है। जनता आगे आए और जिम्मेदारों से पूछे—विकास के नाम पर ब्यावर को बदहाली क्यों मिली और नवसमावेशित क्षेत्रों का विकास आखिर किसके भरोसे है?”