5 March 2026

अजमेर-भीलवाड़ा सीमा पर आस्था का केंद्र: महाराणा सांगा कालीन है गिरवर वाली अन्नपूर्णा माता का दरबार

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आसींद 27 दिसंबर (केकड़ी पत्रिका /विजयपाल सिंह राठौड़ ) अजमेर जिले के सबसे बड़े बांध ‘नारायण सागर’ की पाल के ठीक ऊपर स्थित श्री अन्नपूर्णा माता जी (गिरवर) का मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है। बिजयनगर कस्बे से पश्चिम दिशा में करीब 18 किलोमीटर दूर स्थित यह पावन धाम न केवल प्राकृतिक सुंदरता, बल्कि अपने ऐतिहासिक महत्व के लिए भी जाना जाता है।दो जिलों की सीमा पर विराजित हैं मांगिरवर माता का यह मंदिर भौगोलिक दृष्टि से विशेष स्थान पर स्थित है।

मंदिर जहाँ अजमेर जिले की सीमा और नारायण सागर बांध के सानिध्य में है, वहीं पास ही स्थित गिरवर गाँव भीलवाड़ा जिले के अंतर्गत आता है। यही कारण है कि इसे दोनों जिलों का मिलन स्थल और सांझी विरासत माना जाता है।

जालिया सेकंड से मात्र 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस मंदिर तक पहुँचने के लिए सुगम डामर सड़क की सुविधा उपलब्ध है।महाराणा सांगा काल से जुड़ी है मान्यता इतिहास और जनश्रुतियों के अनुसार, इस मंदिर का संबंध मेवाड़ के प्रतापी शासक महाराणा सांगा के काल से माना जाता है। सदियों पुराने इस स्थान के प्रति लोगों का विश्वास है कि यहाँ आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता। मंदिर की प्राचीनता और माता के चमत्कार ही हैं जो इसे राजस्थान के प्रमुख शक्तिपीठों की श्रेणी में खड़ा करते हैं।दूर-दराज के राज्यों से पहुँचते हैं श्रद्धालुयूं तो प्रत्येक रविवार को यहाँ दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है, लेकिन नवरात्रि के दौरान यहाँ का दृश्य लघु कुंभ जैसा होता है।

राजस्थान ही नहीं, बल्कि गुजरात, महाराष्ट्र और कई दक्षिण भारतीय राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी मन्नतें लेकर माँ के दरबार में पहुँचते हैं। भक्तों का मानना है कि मां अन्नपूर्णा के दर्शन मात्र से जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।पर्यटन और आस्था का संगमनारायण सागर बांध के भराव क्षेत्र के ऊपर स्थित होने के कारण यहाँ का दृश्य अत्यंत मनमोहक है। बारिश के मौसम में जब बांध लबालब होता है, तब मंदिर की छटा देखते ही बनती है। स्थानीय प्रशासन और मंदिर कमेटी द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए समय-समय पर विस्तार कार्य भी किए जाते रहे हैं।”जय गिरवर राय तेरी सदा ही जय हो” के जयकारों से गूंजने वाला यह दरबार आज भी अपनी प्राचीनता और दिव्यता को संजोए हुए है।

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