ग्राम पंचायत गोरधा बनी मिसाल: हरियाली, स्वच्छता और सौंदर्यीकरण से बदली पहचान
कुशायता(सावर ) 19 जून (केकड़ी पत्रिका हंसराज खारोल) आमतौर पर ग्राम पंचायतों की पहचान गंदगी, अव्यवस्था और मूलभूत सुविधाओं के अभाव से जुड़ी रहती है, लेकिन सावर पंचायत समिति की ग्राम पंचायत गोरधा ने इस धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। पंचायत और उसका सुव्यवस्थित परिसर देखने के बाद कोई भी व्यक्ति यह सोचने पर मजबूर हो जाता है कि वह किसी सरकारी कार्यालय में है या किसी निजी संस्थान के आकर्षक परिसर में।ग्राम पंचायत गोरधा में स्वच्छता, हरियाली और सौंदर्यीकरण के इस कार्य का श्रेय प्रशासक पपिता देवी मीणा, ग्राम विकास अधिकारी किशन माली, कनिष्ठ सहायक देवेन्द्र वर्मा, प्रशासक प्रतिनिधि सोहनलाल मीणा तथा रात्रिकालीन चौकीदार रतन बलाई एवं सत्यनारायण वैष्णव को जाता है। इनके निरंतर प्रयासों और समर्पण से पंचायत भवन को आदर्श स्वरूप प्रदान किया गया है।
आज आसपास के क्षेत्रों के लोग विशेष रूप से इस पंचायत का निरीक्षण करने पहुंच रहे हैं। ग्राम पंचायत गोरधा में दिखता है सौंदर्य और स्वच्छता का अनूठा संगमग्राम पंचायत गोरधा मुख्यालय में राजीव गाँधी सेवा केन्द्र गोरधा के पीछे की तरफ नर्सरी लगाई गई है| सभी पौधे जीवित है नियमित रूप से देख भाल भी की जा रही है, समय समय पर पेड पौधो को पानी पिलाया जा रहा है|
सावर ब्लॉक नम्बर एक पर बनी हुई है एक समय यह परिसर गड्ढों और बंजर भूमि से भरा हुआ था, लेकिन पंचायत प्रशासन के प्रयासों से आज यहां हरियाली और सौंदर्य का वातावरण दिखाई देता है।कागजों में नहीं, धरातल पर दिख रही हरियालीजहां कई स्थानों पर वृक्षारोपण केवल कागजों तक सीमित रह जाता है, वहीं ग्राम पंचायत गोरधा ने इसे धरातल पर सफल बनाकर दिखाया है। पिछले वर्ष लगाए गए लगभग 8 हजार पौधों में अधिकांश आज भी जीवित हैं और तीन से चार फीट तक बढ़ चुके हैं।
विशेष बात यह है कि पहले पंचायत को वन विभाग से पौधे मंगवाने पड़ते थे, लेकिन अब पंचायत ने स्वयं की नर्सरी विकसित कर लगभग 6 हजार पौधे तैयार किए हैं। इनमें पीपल, नीम, बरगद, गुलमोहर, शीशम, जामुन, आम, इमली, आंवला, अमरूद, सीताफल, अनार, केला, करौंदा और कल्पवृक्ष सहित कई प्रजातियां शामिल हैं।अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणा बनी ग्राम पंचायत गोरधाग्राम पंचायत गोरधा ने यह साबित कर दिया है कि जनप्रतिनिधि, अधिकारी और कर्मचारी इच्छाशक्ति के साथ कार्य करें तो सीमित संसाधनों में भी सरकारी परिसरों को आदर्श एवं आकर्षक बनाया जा सकता है।

स्वच्छता, हरियाली और जनसहभागिता का यह मॉडल क्षेत्र की अन्य ग्राम पंचायतों के लिए प्रेरणास्रोत बनता जा रहा है।‘गियांवाकी वन क्षेत्र अभियान’ से बढ़ी हरियालीराजस्थान सरकार के गियांवाकी वन क्षेत्र अभियान के तहत ग्राम पंचायत गोरधा में व्यापक स्तर पर वृक्षारोपण किया गया है। चोकी नाड़ी के पास चारागाह भूमि पर 2 हजार पौधे, चिकलिया गांव में 300 बीघा चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाकर 2 हजार पौधे, सोकिया का खेड़ा में बालाजी मंदिर के पास चारागाह भूमि पर 2 हजार पौधे तथा गोपालपुरा में 2 हजार पौधे लगाए गए हैं।पंचायत क्षेत्र में लगभग 30 प्रजातियों के 8 हजार पौधों का रोपण किया गया है। नियमित देखभाल के कारण इन पौधों की वृद्धि अच्छी हो रही है और क्षेत्र में हरियाली लगातार बढ़ रही है।पंचायत परिसर में नियमित साफ-सफाई की व्यवस्था की जाती है। विभिन्न शिविरों के आयोजन को देखते हुए स्थायी बैठने की व्यवस्था तथा स्वच्छ शौचालय सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। रात्रिकालीन चौकीदार रतन बलाई एवं सत्यनारायण वैष्णव परिसर की देखरेख में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।सावर पंचायत समिति में सर्वाधिक वृक्षारोपण करने वाली ग्राम पंचायत गोरधा बनीग्राम पंचायत गोरधा सावर पंचायत समिति क्षेत्र में सर्वाधिक वृक्षारोपण करने वाली पंचायत बनकर उभरी है।
पंचायत द्वारा किए गए व्यापक पौधारोपण और उनके संरक्षण के प्रयासों की क्षेत्रभर में सराहना हो रही है।चिकलिया में 300 बीघा चारागाह भूमि पर लगाया गया 2000 पौधों का वन क्षेत्रग्राम पंचायत गोरधा के अंतर्गत चिकलिया गांव में 300 बीघा चारागाह भूमि से अतिक्रमण हटाकर 2000 पौधों का वृक्षारोपण किया गया है। इस कार्य में प्रशासक पपिता देवी मीणा के नेतृत्व और पंचायत प्रशासन की सक्रिय भूमिका रही। उनके प्रयासों से चारागाह भूमि का संरक्षण होने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।ग्राम पंचायत गोरधा की यह पहल ग्रामीण विकास, पर्यावरण संरक्षण और जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बनकर उभरी है। पंचायत की हरियाली, स्वच्छता और सौंदर्यीकरण की यह मुहिम अन्य ग्राम पंचायतों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही है।