18 June 2026

वीरता, स्वाभिमान और शौर्य का महाकुंभ बना गिरवर, हजारों लोगों की मौजूदगी में हुआ महाराणा प्रताप की भव्य प्रतिमा का अनावरण

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बिजयनगर 18 जून( केकड़ी पत्रिका तरन दीप सिंह) वीरता, स्वाभिमान और शौर्य का महाकुंभ बना गिरवर, हजारों लोगों की मौजूदगी में हुआ महाराणा प्रताप की भव्य प्रतिमा का अनावरणगिरवर। मेवाड़ की आन-बान-शान, हिंदू स्वाभिमान के अमर प्रतीक एवं राष्ट्र गौरव वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की नव निर्मित भव्य प्रतिमा का अनावरण गुरुवार को ऐतिहासिक ठिकाना गिरवर में अभूतपूर्व जनसैलाब की उपस्थिति में बड़े ही धूमधाम, उत्साह और गरिमामय वातावरण के बीच संपन्न हुआ। पूरा क्षेत्र महाराणा प्रताप के जयघोषों से गूंज उठा और ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो हल्दीघाटी का गौरवशाली इतिहास पुनः जीवंत हो उठा हो।प्रतिमा अनावरण समारोह में क्षेत्रभर के राजपूत सरदारों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, युवाओं एवं हजारों श्रद्धालुओं ने भाग लेकर महाराणा प्रताप के प्रति अपनी श्रद्धा और सम्मान व्यक्त किया।

कार्यक्रम स्थल पर सुबह से ही लोगों का पहुंचना शुरू हो गया था और देखते ही देखते पूरा परिसर जनसमूह से खचाखच भर गया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आसींद विधायक जबर सिंह सांखला एवं मसूदा विधायक वीरेंद्र सिंह कानावत ने महाराणा प्रताप की प्रतिमा का अनावरण कर पुष्पांजलि अर्पित की। अपने ओजस्वी संबोधन में दोनों जनप्रतिनिधियों ने कहा कि महाराणा प्रताप केवल राजपूत समाज ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण भारतवर्ष के गौरव हैं। उनका जीवन त्याग, संघर्ष, राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और अदम्य साहस का ऐसा अध्याय है, जो सदियों तक देशवासियों को प्रेरणा देता रहेगा।विधायक जबर सिंह सांखला ने कहा कि महाराणा प्रताप ने विपरीत परिस्थितियों में भी कभी अपने स्वाभिमान से समझौता नहीं किया और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। वहीं वीरेंद्र सिंह कानावत ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को महाराणा प्रताप के आदर्शों को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन हमें सिखाता है कि सम्मान और स्वतंत्रता से बढ़कर कुछ भी नहीं होता।इस अवसर पर हुड्डा प्रधान कृष्णा सिंह, मसूदा प्रधान प्रतिनिधि सुरेंद्र सिंह, करतार सिंह, हनुमंत सिंह, दिलीप सिंह, देवेन्द्र सिंह, दुर्गा सिंह, महिपाल सिंह, अशोक साहू सहित अनेक गणमान्य नागरिक मंचासीन रहे और उन्होंने भी महाराणा प्रताप के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए उनके आदर्शों को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।कार्यक्रम में मुरायला, कनिया, जालिया, बड़ली, बड़ी, बिजयनगर, गुलाबपुरा, अमरतिया, साफोला, उंखलिया, भेरूखेड़ा, केसरपुरा, किराप, बांधनवाड़ा, जमोला, भीमलात, खेजड़ी, आजाद नगर, नाहरगढ़, कुंड का लाम्बा तथा शेरगढ़ खारी का लाम्बा सहित दर्जनों गांवों और ठिकानों से समाजजन बड़ी संख्या में पहुंचे। पारंपरिक राजपूती वेशभूषा, केसरिया साफों और हाथों में ध्वज लिए युवाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। पूरे कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति और शौर्य से ओतप्रोत वातावरण बना रहा।

प्रतिमा अनावरण के बाद उपस्थित जनसमूह ने महाराणा प्रताप अमर रहें, भारत माता की जय और जय मेवाड़ के नारों से वातावरण को गुंजायमान कर दिया। समारोह में वक्ताओं ने कहा कि महाराणा प्रताप का संघर्ष केवल एक युद्ध नहीं था, बल्कि यह स्वाभिमान, संस्कृति और राष्ट्र की अस्मिता को बचाने का महायज्ञ था। उनके जीवन का प्रत्येक क्षण आने वाली पीढ़ियों को साहस, त्याग और राष्ट्रभक्ति का संदेश देता है।कार्यक्रम को सफल बनाने में क्षेत्र के राजपूत सरदारों, समाजसेवियों, युवाओं एवं ग्रामीणों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन की भव्यता, जनसहभागिता और अनुशासित व्यवस्था ने सभी आगंतुकों का मन मोह लिया। उपस्थित लोगों ने इसे क्षेत्र के इतिहास के सबसे यादगार और गौरवशाली आयोजनों में से एक बताया।महाराणा प्रताप के सम्मान में उमड़ा यह जनसैलाब इस बात का प्रमाण है कि आज भी मेवाड़ की वीरता, स्वाभिमान और राष्ट्रभक्ति की परंपरा जन-जन के हृदय में जीवित है। गिरवर की धरा पर आयोजित यह ऐतिहासिक समारोह आने वाले वर्षों तक क्षेत्रवासियों की स्मृतियों में स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा।

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