23 May 2026

भक्त की भक्ति की भावना में शक्ति होती है — मुनि सुश्रुत सागर महाराज

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केकड़ी 09 सितंबर (केकड़ी पत्रिका न्यूज पोर्टल) देवगांव गेट के पास चंद्रप्रभु चैत्यालय में प्रवचन करते हुए मुनि सुश्रुत सागर महाराज ने कहा कि एक सच्चा भक्त भगवान से प्रार्थना करता हुआ यही कहता है कि हे प्रभु मैं तो अपने सारे दुःख आपसे ही कहूंगा, सुनाऊंगा। हें प्रभु मैं यह भी जानता हूं कि आप तो वीतरागी है लेकिन फिर भी आप ही तो मेरे सब कुछ है,यदि मैं आपसे नहीं कहूंगा तो फिर किसके पास जाऊं।
मुनिराज ने कहा कि भक्त की भक्ति की भावना में शक्ति होती है, भक्त भगवान की विशेष भक्ति करता है और प्रभु भक्ति में अपने आपको भगवान को ही सौंप देता है। देव शास्त्र गुरु की सच्ची भावना,मन,भक्ति,श्रद्धा, समर्पण की कसौटी पर खरा उतरने से भक्ति की ताकत के फलरुप उसका कर्म,कार्य सिद्ध भी हो जाता है, सही मार्ग प्रशस्त होता है। देव शास्त्र गुरु,जिनेन्द्र प्रभु की भक्ति नि:शंक यानि शंका रहित पूरी श्रद्धा के साथ दर्शन पूजा आराधना करनी चाहिए। निर्मल भावनाओं से ही धर्म ध्यान होता है। व्यक्ति को धन के साथ साथ धर्म से समृद्ध होना चाहिए।जो धर्म से समृद्ध बनता है उसकी भावनाएं भी प्रबल होती है और उसे सब कुछ प्राप्त होता है। धर्म से समृद्ध होने वाला सेवा से भी समृद्धशाली होता है। वह बिना नाम की इच्छा किए निड़रता और जिम्मेदारी से सभी की सेवा, परोपकार में अग्रणी भूमिका में रहता है।

मुनिराज ने कहा कि हमें अपने दिनभर में किये गये पापों का प्रायश्चित करना चाहिए। दिनभर में मैंने खोटे,गलत, दुष्ट चिंतन किया होवे,कुछ बोला होवे,देखा होवे,प्रवृत्ति क्रियाएं की होवे,वे सभी पाप कर्म नष्ट होवे,हे प्रभु मैं पापी हूं,मेरे सब दोष मिथ्या होवे, अपने दुष्कर्मो की निन्दा करते हुए गुरु की साक्षी में प्रायश्चित कर लेना चाहिए। दिनभर में किए गए पापों का नित्य प्रक्षालन करना चाहिए यह परिणामों में निर्मलता लाता है।साथ ही अपने पूर्व में की गई गलतियों को सच्चे मन से स्वीकार करते हुए, गुरु के सामने अपनी निंदा करते हुए, अब सुधार की दृष्टि रखते हुए निर्मल व उत्तम भावना से बता देना चाहिए।

दिगम्बर जैन समाज एवं वर्षायोग समिति के प्रवक्ता नरेश जैन ने बताया कि मुनिराज के प्रवचन से पहले चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन एवं मुनि सुश्रुत सागर महाराज के पाद प्रक्षालन करने का सौभाग्य इन्दरमल राजकुमार राकेश कुमार अरविंद कुमार कल्पित कुमार जैन डाबर परिवार को मिला।

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