तिल चौथ (संकट चतुर्थी) का व्रत महिलाओं ने श्रद्धा व विधि-विधान से रखा
कुशायता,06 जनवरी ( केकड़ी पत्रिका/हंसराज खारोल) ग्राम पंचायत कुशायता मुख्यालय सहित कुशायता, बिसुदनी, गोरधा, सोकिया का खेड़ा, पिपलाज, कीडवा का झोपड़ा, सूरजपुरा मेहरूकला आमली मोटालाव कुशायता का झोपड़ा बनेडिया चिकलिया लोधा का झोपड़ा सहित आसपास के सभी गांवों में मंगलवार को महिलाओं ने तिल चौथ (संकट चतुर्थी) का व्रत श्रद्धा और आस्था के साथ रखा। ज्योतिष पंचांग के अनुसार माघ मास कृष्ण पक्ष की संकट चतुर्थी का यह व्रत 6 जनवरी 2026, मंगलवार को रहा।
पिपलाज निवासी पंडित राजकुमार पाराशर ने बताया कि 6 जनवरी 2026 को चतुर्थी तिथि का आगमन प्रातः 8:02 बजे के बाद हुआ, जो पूर्ण रात्रि तक रही। यह व्रत महिलाओं के अखंड सुख-सौभाग्य, पति की दीर्घायु, संतान सुख, आयु एवं आरोग्य के लिए श्रेष्ठ माना गया है।
व्रतधारी महिलाओं ने दिनभर निराहार या फलाहार रहकर रात्रि में चंद्रमा के दर्शन किए। इसके बाद दूध, जल व शक्कर मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य अर्पित किया गया। चौथ माता व भगवान गणेश का विधि-विधान से पूजन कर तिल के लड्डू, तिलपट्टी, गुड़ के लड्डू, फल व मिठाइयों का भोग लगाया गया, तत्पश्चात भोजन ग्रहण किया गया।
पंडित पाराशर ने बताया कि तिल चौथ का व्रत वर्ष में केवल एक बार माघ मास कृष्ण पक्ष में आता है। इस वर्ष तीज तिथि मंगलवार को सुबह 8:02 बजे तक रही, इसके बाद पूर्ण रात्रि चतुर्थी तिथि रही। विधि-विधान से व्रत-पूजन करने से महिलाओं को अखंड सुख-सौभाग्य, पति सुख व शांति की प्राप्ति होती है तथा संतान की आयु वृद्धि के श्रेष्ठ योग बनते हैं। मलमास एवं शुक्र तारे के अस्त होने के कारण इस बार चतुर्थी का उद्यापन कार्यक्रम नहीं हुआ।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पद्म पुराण, ब्रह्म पुराण सहित अनेक ग्रंथों में उल्लेख है कि मंगलवार व चतुर्थी के संयोग पर गया कुंड में गया जी प्रकट होते हैं। इस दिन जल में स्नान, दान-पुण्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। साथ ही पितरों के लिए नारायण बलि, पिंडदान, तर्पण व दान-पुण्य करने से पितृ शांति व आशीर्वाद मिलता है तथा भूत-प्रेत व आत्माओं को भी मोक्ष गति प्राप्त होती है।
क्षेत्र में तिल चौथ व्रत को लेकर महिलाओं में विशेष उत्साह देखने को मिला और धार्मिक वातावरण बना रहा।
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