एम एल डी में गांधी-शास्त्री जयंती पर गूंजा सत्य, अहिंसा और राष्ट्रसेवा का संदेश

केकड़ी अक्टूबर केकड़ी पत्रिका) श4ई मिश्रीलाल दुबे उच्च माध्यमिक अकादमी और श्री मिश्रीलाल दुबे बालिका उच्च माध्यमिक अकादमी में गुरुवार को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती श्रद्धा के साथ मनाई गई। दोनों संस्थानों में विद्यार्थियों ने प्रस्तुतियों के जरिए गांधीजी के सत्य-अहिंसा और शास्त्रीजी के सादगी, अनुशासन व राष्ट्रसेवा के संदेश को सामने रखा।
एम एल डी संस्थान के निदेशक डॉ. अविनाश दुबे, अनिरुद्ध दुबे और प्रधानाचार्य ब्रह्मानंद शर्मा ने गांधीजी एवं शास्त्रीजी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम की शुरुआत की। सुनिधि जांगिड़ ने ‘रघुपति राघव राजा राम’ भजन प्रस्तुत किया। संगीत शिक्षक मुरलीधर बारेठ ने भी गांधीजी के भजन की प्रस्तुति देकर माहौल को भावपूर्ण बना दिया संजय सेन ने गांधीजी के जीवन और स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला। दिनेश चौधरी ने गांधीजी के विचारों और आदर्शों की जानकारी दी। प्रधानाचार्य ब्रह्मानंद शर्मा ने कहा कि गांधीजी ने सत्य और अहिंसा को हथियार बनाकर देश को नई राह दिखाई, वहीं लाल बहादुर शास्त्री ने सादगी और कर्तव्यनिष्ठा की मिसाल कायम की।




उन्होंने विद्यार्थियों से इन मूल्यों को जीवन में उतारने का आह्वान किया। निदेशक डॉ. अविनाश दुबे ने गांधीजी के जीवन से सत्य, स्वच्छता, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सद्भाव की सीख लेने की बात कही। निदेशक अनिरुद्ध दुबे ने शास्त्रीजी के सादगीपूर्ण जीवन और राष्ट्र के प्रति समर्पण को अनुकरणीय बताया। उन्होंने कहा कि महापुरुषों को याद करने का सार उनके विचारों को आचरण में उतारने में है। मंच संचालन विकास सिंह शक्तावत ने किया। एम एल डी बालिका अकादमी में सचिव चंद्र प्रकाश दुबे और प्रधानाचार्या विनीता जोशी ने चित्रों पर पुष्प अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। विद्यार्थियों ने गांधीजी एवं शास्त्रीजी के जीवन और योगदान पर भाषण व कविताएं प्रस्तुत कीं।
प्रस्तुतियों में सत्य, अहिंसा, स्वच्छता, सादगी, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के संदेश उभरकर सामने आए। प्रधानाचार्या विनीता जोशी ने कहा कि दोनों महापुरुषों का जीवन विद्यार्थियों को जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देता है। सचिव चंद्र प्रकाश दुबे ने सत्यनिष्ठा, अनुशासन और राष्ट्रप्रेम को जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की। कार्यक्रम के समापन पर दोनों अकादमियों के विद्यार्थियों और स्टाफ ने गांधीजी एवं शास्त्रीजी के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।