बघेरा में सफाई व्यवस्था बदहाल, नाले का मलबा सड़क किनारे छोड़ने से ग्रामीण परेशान
- तीन-चार महीने में एक बार होती है सफाई, फिर भी हालात जस के तस
बघेरा 10 मई (केकड़ी पत्रिका) पंचायत क्षेत्र में सफाई व्यवस्था पूरी तरह भगवान भरोसे नजर आ रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंचायत की ओर से तीन-चार महीने में एक बार ही सफाई करवाई जाती है, लेकिन सफाई के बाद नालों से निकला मलबा और कचरा सड़क किनारे ही ढेर लगाकर छोड़ दिया जाता है। इससे सफाई का कोई स्थायी लाभ नहीं मिल पाता और कुछ ही दिनों में हालात फिर पहले जैसे हो जाते हैं।
नाले का मलबा सड़क पर फैलने से राहगीरों को परेशानी
ग्रामीणों ने बताया कि नाले की सफाई के बाद कीचड़ और कचरा सड़क किनारे छोड़ दिया जाता है, जो सूखकर दोबारा सड़क और नालियों में फैल जाता है। इससे पूरी सड़क पर गंदगी फैल जाती है और पैदल चलने वालों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वाहन चालकों को भी फिसलन और रास्ता अवरुद्ध होने जैसी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं।
दिखावे की सफाई, बाद में उठता है कचरा

स्थानीय लोगों का कहना है कि पंचायत की ओर से केवल कर्तव्य पूर्ति और दिखावे के लिए सफाई की जाती है। सफाई के बाद कई दिनों तक कचरे का ढेर वहीं पड़ा रहता है। जब तक ट्रैक्टर-ट्रॉली से उसे उठाया जाता है, तब तक आधा कचरा वापस सड़क और नालियों में फैल चुका होता है। इससे सफाई व्यवस्था केवल औपचारिकता बनकर रह गई है।
जलभराव और कीचड़ से बीमारी फैलने का खतरा
लगातार कीचड़, गंदगी और जलभराव के कारण क्षेत्र में बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंदगी के कारण मोहल्ले में दुर्गंध फैल रही है, जिससे रहवासियों का जीना मुश्किल हो गया है। यह स्थिति संक्रमण जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को भी जन्म दे सकती है।
राहगीरों को सबसे ज्यादा परेशानी
हर आने जाने वाले व्यक्तियों विशेषकर स्कूली बच्चों की भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों के जूते-कपड़े कीचड़ से गंदे हो जाते हैं और फिसलने का खतरा भी बना रहता है। अभिभावकों में इसे लेकर चिंता का माहौल है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार
स्थानीय निवासी फौजी साहू, राज्जाक अली, गोपाल महेश्वरी, पारस जैन, लोकेश जैन, बिरजू माली और बाबू खां ने प्रशासन से मांग की है कि सफाई कार्य के तुरंत बाद नालियों से निकले कचरे और मलबे को तत्काल हटाया जाए, ताकि सड़क पर गंदगी और कीचड़ न फैले तथा राहगीरों और स्कूली बच्चों को राहत मिल सके।
वर्षों पुरानी समस्या, समाधान का इंतजार
ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या आज की नहीं बल्कि वर्षों पुरानी है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं किया गया।