हरि बोल प्रभात फेरी, राम कथा और महायज्ञ के साथ कालाभाटा महादेव मंदिर में नौ दिवसीय आयोजन का भव्य समापन
मेवदाकला, 3 मई(केकड़ी पत्रिका) मेवदाकला स्थित कालाभाटा महादेव मंदिर में आयोजित नौ दिवसीय शतचंडी महायज्ञ एवं श्री राम कथा का रविवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ भव्य समापन हुआ। सिद्ध पीठ कालाभाटा महादेव मंदिर के पुजारी योगीराज हीरानाथ महाराज के सानिध्य में हुए इस धार्मिक आयोजन में क्षेत्र सहित बाहर से आए श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
समापन अवसर पर शिव घाट तालाब से “हरि बोल” प्रभात फेरी की शुरुआत हुई, जो गांव के प्रमुख मार्गों से होकर मंदिर परिसर पहुंची। प्रभात फेरी के दौरान भक्तजन “रघुपति राघव राजा राम”, “गोविंद बोलो हरि गोपाल बोलो”, “शिव शंकर भोला डाला रे” जैसे भजनों का संकीर्तन करते हुए भक्ति में लीन नजर आए। जगह-जगह ग्रामीणों द्वारा शीतल जल, शरबत की व्यवस्था की गई तथा घरों की छतों से पुष्प वर्षा कर भक्तों का स्वागत किया गया।योगीराज हीरानाथ महाराज ने बताया कि 25 अप्रैल को भव्य कलश यात्रा के साथ प्रारंभ हुए इस आयोजन में प्रतिदिन यज्ञशाला में यजमानों द्वारा पूर्णाहुति, कल्पवृक्ष विवाह एवं श्री राम कथा का आयोजन हुआ।कथा वाचक भागीरथ सारस्वत सेलू ने श्री राम कथा के अंतिम दिन भगवान श्रीराम के राज्याभिषेक प्रसंग का मार्मिक वर्णन किया।

उन्होंने बताया कि रावण और भगवान श्रीराम के बीच सात दिन तक चले युद्ध के अंतिम दिन गुरु अगस्त्य के निर्देशानुसार प्रभु श्रीराम ने विशेष 31 बाणों का संधान कर रावण का वध किया। इसके पश्चात प्रभु श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान, सुग्रीव, विभीषण सहित अयोध्या लौटे, जहां उनके आगमन पर उत्सव का माहौल बन गया और गुरु वशिष्ठ द्वारा तिलक कर उनका राज्याभिषेक संपन्न कराया गया।कथा के दौरान महाराज ने हनुमानजी की भक्ति का वर्णन करते हुए कहा कि सच्ची श्रद्धा और समर्पण से भगवान प्रसन्न होते हैं और जीवन में कल्याण का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने कहा कि भगवान की शरण में रहने से ही जीवन में राम कथा का साक्षात्कार संभव है।कार्यक्रम में केकड़ी विधायक शत्रुघ्न गौतम ने भी पहुंचकर कथा में भाग लिया तथा कथा वाचक और योगीराज हीरानाथ महाराज का स्वागत कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
मंदिर प्रवक्ता चंदू पंडित ने बताया कि आयोजन के दौरान कल्पवृक्ष विवाह, भजन संध्या और संतों का सम्मान भी किया गया। भजन संध्या में भजन गायक कालूराम एवं योगेंद्र ने भक्तिमय प्रस्तुतियां दीं। समापन पर संतों की विदाई, स्वागत-सम्मान और महाप्रसादी का वितरण किया गया।