धर्म की जड़ पाताल तक होती है,धर्म ही जीव का हित करने वाला होता है : श्रमणोपाध्याय श्री विकसंत सागर महामुनि राज
केकड़ी 26 फरवरी ( केकड़ी पत्रिका) धर्म की जड़ पाताल तक होती है,धर्म ही जीव का हित करने वाला होता है, इसलिए निरंतर धर्म क्रिया करते रहना चाहिए और श्रावक को धर्म के प्रति अपने कर्तव्य का पालन करना चाहिए । देवशास्त्र पूजा, गुरु उपासना, स्वाध्याय, संयम तप ,दान यह सभी धार्मिक क्रियाएं प्रतिदिन करना चाहिए ।
बोहरा कॉलोनी स्थित श्री नेमिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में अष्टानिका पर्व के अवसर पर आयोजित धर्म सभा में परम पूज्य गणाचार्य श्री विराग सागर महाराज के सुयोग्य युवा शिष्य श्रमणोपाध्याय श्री विकसंत सागर महामुनि राज ने अपने प्रवचन के दौरान कहे । उन्होंने कहा कि भगवान की अष्टद्रव्य से पूजन निग्रन्थ गुरु की उपासना, सेवा ,आहार दान एवं वैयावृत्ति जिनवाणी वाचन, कुल की मर्यादा का ध्यान रखना और धर्म प्रभावना में सदैव तत्पर रहना चाहिए ।
प्रातः जिनाभिषेक,शांति धारा , व नित्य नियम पूजा मुनिससंघ के सानिध्य में संपन्न हुए। मध्यान में मुनिससंघ के सानिध्य में अष्टानिका महापर्व पर्व के अवसर पर सिद्ध चक्र महामंडल विधान का आयोजन किया गया जिसमें सिद्धों के 32 अर्घ्य समर्पित किए गए ।शाम को आरती ,भक्ति संगीत ,शास्त्र स्वाध्याय के साथ आनंद यात्रा संपन्न हुई । समाज के अध्यक्ष ज्ञान चंद जैन ज्वैलर्स व मंत्री कैलाश जैन मावा वालों ने बताया कि मुनि संघ के साथ दो मुनि एक क्षुल्लक व 2 क्षुल्लिका माताजी श्री नेमीनाथ जैन मंदिर बोहरा कॉलोनी में विराजमान है ।