संस्कृत वैज्ञानिक अनुसंधान का आधार, इसके संरक्षण से ही भारत बनेगा पुनः विश्वगुरु: दत्तात्रेय वज्रल्ली
केकड़ी 01 जनवरी (केकड़ी पत्रिका/अम्बा लाल गुर्जर)शहर में सात दिवसीय संस्कृत प्रबोधन वर्ग का हुआ भव्य समापन- विश्वभर में एक करोड़ से अधिक लोग कर रहे हैं संस्कृत में संवादकेकड़ी। संस्कृत भारती चित्तौड़प्रांत के तत्वावधान में आयोजित सात दिवसीय संस्कृत भाषा प्रबोधन वर्ग का समापन समारोह स्थानीय नगर में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता, हैदराबाद से पधारे संस्कृत भारती के अखिल भारतीय सह-संगठन मंत्री श्री दत्तात्रेय वज्रल्ली रहे।
अपने संबोधन में श्री वज्रल्ली ने कहा कि संस्कृत को ‘मृत भाषा’ कहना सर्वथा गलत है, वास्तव में यह ‘अमृत भाषा’ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज दुनिया के विकसित राष्ट्र जैसे जर्मनी और अमेरिका, भारतीय संस्कृत ग्रंथों के आधार पर ही आधुनिक विज्ञान की खोज कर रहे हैं। संस्कृत अपनी विशुद्ध व्याकरण और वैज्ञानिकता के कारण ही कंप्यूटर और अंतरिक्ष विज्ञान के लिए भी सबसे उपयुक्त मानी जा रही है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में पूरे विश्व में एक करोड़ से अधिक लोग दैनिक व्यवहार में संस्कृत का प्रयोग कर रहे हैं। राजस्थान में वर्तमान में तीन प्रबोधन वर्गों का आयोजन केकड़ी, बीकानेर और अलवर में किया जा रहा है।

मुख्य अतिथि स्वामी हरिदास जी महाराज (नृसिंह द्वारा) ने कहा कि प्रत्येक भारतीय की पहचान संस्कृत से है। उन्होंने शास्त्र और शस्त्र दोनों के संरक्षण पर बल दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रांताध्यक्ष महेश शर्मा ने की।सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन:समापन अवसर पर शिविर के संभागियों (पाणिनि और पतंजलि गण) ने संस्कृत नाटकों और नृत्यों की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुतियां दीं। प्रतिभागी विशाल और माधवी ने शिविर के अनुभवों को साझा करते हुए इसे जीवन को बदलने वाला अनुभव बताया।
इनकी रही गरिमामय उपस्थिति
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के सम्मुख दीप प्रज्वलन से हुआ। इस दौरान वर्ग संयोजक डॉ. हरिओमशरण शर्मा, प्रांत मंत्री डॉ. मधुसूदन शर्मा, डॉ. मीठालाल माली सहित विद्या भारती, भारत विकास परिषद और अन्य संगठनों के पदाधिकारी व गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। अंत में प्रांताध्यक्ष महेशचंद्र शर्मा ने सहयोग देने वाले सभी संगठनों भारत विकास परिषद, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, शिक्षक संघ राष्ट्रीय, रेड क्रॉस सोसायटी, बढ़ते कदम, विद्या भारती समेत भामाशाहों और नगरवासियों का आभार व्यक्त किया।