संगीत,समाजशास्त्र और रसायन विज्ञान में शोध:श्री प्राज्ञ महाविद्यालय के तीन व्याख्याताओं को डॉक्टरेट की उपाधि
बिजयनगर 02 जनवरी (केकड़ी पत्रिका/तरनदीप सिंह) वर्ष 2025 श्री प्राज्ञ महाविद्यालय, बिजयनगर के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण रहा, जब महाविद्यालय के तीन प्रवक्ताओं को डॉक्टरेट (पी एच डी) की उपाधि से सम्मानित किया गया। इस उपलब्धि से न केवल महाविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई है, बल्कि विद्यार्थियों और शिक्षकों में भी उत्साह का वातावरण बना है ।
महाविद्यालय के प्रवक्ता छोटू लाल डांगी,दिनेश कुम्पावत एवं सुरेश कुमार जोशी ने अपने-अपने विषयों में उच्च शोध कार्य पूर्ण कर डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। यह उपलब्धि उनके सतत परिश्रम, समर्पण और अकादमिक अनुशासन का प्रतिफल है।
संगीत में पीएचडी
प्रवक्ता छोटू लाल डांगी ने संगीत विषय में सीडब्रुक यूनिवर्सिटी से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। उनके शोध कार्य में भारतीय संगीत की शास्त्रीय परंपराओं, रागात्मक संरचना तथा संगीत के सामाजिक प्रभावों पर गहन अध्ययन किया गया है। उनके इस शोध से संगीत के विद्यार्थियों को नई दिशा और प्रेरणा मिलेगी।
समाज शास्त्र में पीएचडी
इसी प्रकार दिनेश कुम्पावत ने समाजशास्त्र विषय में महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि अर्जित की। उनका शोध सामाजिक संरचना, सामाजिक परिवर्तन एवं समकालीन समाज की चुनौतियों पर केंद्रित रहा। उनके अध्ययन से समाजशास्त्र के क्षेत्र में शोध और शिक्षण को नई दृष्टि प्राप्त होगी।
रसायन शास्त्र में पीएचडी
वहीं सुरेश कुमार जोशी ने रसायन शास्त्र विषय में भगवंत यूनिवर्सिटी से पी एच डी की उपाधि प्राप्त की। उनका शोध रसायन विज्ञान के प्रयोगात्मक एवं सैद्धांतिक पहलुओं पर आधारित रहा, जो विज्ञान के विद्यार्थियों के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. दुर्गा कंवर मेवाड़ा ने तीनों प्रवक्ताओं को इस उपलब्धि पर शुभकामनाएं दीं और कहा कि यह उपलब्धि महाविद्यालय के लिए गर्व का विषय है। इससे न केवल शिक्षण की गुणवत्ता में वृद्धि होगी, बल्कि शोध एवं नवाचार को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे विद्वान प्रवक्ताओं के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास संभव है।
इस अवसर पर महाविद्यालय के समस्त स्टाफ सदस्यों एवं विद्यार्थियों ने प्रसन्नता व्यक्त की और तीनों प्रवक्ताओं के उज्ज्वल भविष्य की कामना की। निस्संदेह महाविद्यालय की यह उपलब्धि शिक्षा और शोध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।