पूर्व छात्र शांतिलाल बडोला ने दिए ₹1.21 करोड़, श्री प्राज्ञ महाविद्यालय में बनेगा आधुनिक शैक्षणिक ब्लॉक

बिजयनगर, 4 जुलाई (केकड़ी पत्रिका/तरन दीप सिंह) शिक्षा, संस्कार और सामाजिक उत्तरदायित्व का प्रेरणादायी उदाहरण शनिवार को उस समय देखने को मिला, जब श्री प्राज्ञ जैन स्मारक समिति द्वारा संचालित NAAC ‘A’ ग्रेड मान्यता प्राप्त श्री प्राज्ञ महाविद्यालय में नवीन शैक्षणिक ब्लॉक के निर्माण हेतु भूमि पूजन समारोह आयोजित हुआ। महाविद्यालय के पूर्व छात्र एवं हैदराबाद के उद्योगपति-समाजसेवी शांतिलाल बडोला तथा उनकी पत्नी उषा बडोला ने महाविद्यालय के विकास के लिए ₹1.21 करोड़ का योगदान दिया।यह राशि आधुनिक सुविधाओं से युक्त शैक्षणिक ब्लॉक के निर्माण में उपयोग होगी, जिससे विद्यार्थियों को स्मार्ट कक्षाएं, बेहतर अधिगम वातावरण और आधुनिक शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध होंगे।अपने संबोधन में शांतिलाल बडोला ने कहा कि महाविद्यालय से मिली शिक्षा, संस्कार और शिक्षकों के मार्गदर्शन ने उन्हें जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी।
उन्होंने कहा कि मातृ संस्था के प्रति यह उनका नैतिक दायित्व है कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहतर शैक्षणिक सुविधाओं के निर्माण में सहयोग करें।भूमि पूजन महावीर नागला ने जैन विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि अनराज बापना, धनराज बापना और नवलकिशोर बाफना ने शिक्षा में किए गए निवेश को समाज का सबसे श्रेष्ठ निवेश बताया तथा बडोला परिवार के योगदान की सराहना की।समारोह में ऋषभ लोढ़ा, दिलीप मेहता, नवलकिशोर बाफना, प्रेमराज बोहरा, अजित लोढ़ा, डॉ. नवल सिंह जैन, अनुराग चोरड़िया, अंकुश नाहर, ज्ञानचंद कोठारी, संजीव भटेवड़ा सहित समिति एवं महाविद्यालय के पदाधिकारी, शिक्षाविद्, उद्योगपति, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
पूर्व चेयरमैन अशोक बडोला, खुशबू चौपड़ा, कमांडर आदर्श गोलेछा सहित अन्य वक्ताओं ने कहा कि शांतिलाल बडोला का यह योगदान केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि मातृ संस्था के प्रति कृतज्ञता और शिक्षा के प्रति समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण है।समारोह के दौरान योगेंद्रराज सिंघवी ने शांतिलाल बडोला, उषा बडोला एवं उनके परिवार का स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया। अंत में समिति अध्यक्ष नवलकिशोर बाफना ने सभी अतिथियों एवं सहयोगकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ₹1.21 करोड़ का यह योगदान संस्थान के इतिहास का स्वर्णिम अध्याय साबित होगा और विद्यार्थियों को आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।