आसींद के शिल्पकार राजू शर्मा की अनूठी साधना: ‘ओम्’ को गुरु मानकर बनाई खाटू श्याम की मनमोहक प्रतिमा
आसींद 04 फरवरी (केकड़ी पत्रिका/विजयपाल सिंह राठौड़ ) कहते हैं कि अगर अटूट श्रद्धा और निरंतर अभ्यास हो, तो पत्थर में भी जान फूंकी जा सकती है। ऐसा ही चमत्कार कर दिखाया है आसींद के उभरते मूर्तिकार राजू भाई शर्मा ने। हाल ही में उनके द्वारा निर्मित भगवान खाटू श्याम जी की एक भव्य और आकर्षक मूर्ति क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। बचपन का शौक बना जीवन का लक्ष्य अपनी कलात्मक यात्रा के बारे में बताते हुए राजू शर्मा ने कहा कि उन्हें बचपन से ही आर्ट का शौक था। करीब 10-12 साल की उम्र से ही उन्होंने स्कूल के समय से पेंटिंग और छोटी-छोटी कलाकृतियाँ बनाना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे यह शौक मूर्तिकला में बदल गया। ओम् उच्चारण और गुरु की प्रेरणा राजू शर्मा ने अपने हुनर के पीछे की प्रेरणा का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने किसी संस्थान से विधिवत शिक्षा नहीं ली, बल्कि: पहली प्रेरणा: उन्हें अपने भाई जगदीश जी से मिली। आध्यात्मिक गुरु: उन्होंने ‘ओम्’ शब्द को ही अपना गुरु माना और इसी के उच्चारण व साधना से अपनी कला के शिखर को प्राप्त किया ।समाजसेवी निर्मल मेहता ने इस सुंदर प्रतिमा का अवलोकन किया और राजू शर्मा की कला की जमकर सराहना की।
उन्होंने कहा कि आसींद जैसे छोटे क्षेत्र में ऐसी छुपी हुई प्रतिभाओं का होना गर्व की बात है। उन्होंने मूर्तिकार और उनकी पूरी टीम को भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। भक्ति और कला का संगम तैयार की गई प्रतिमा में बाबा श्याम का श्रृंगार और रोशनी का संयोजन इतना अद्भुत है कि भक्तों को इसमें साक्षात ईश्वर की झलक दिखाई दे रही है। प्रतिमा के सामने “जय श्री खाटू श्याम जी की” के जयकारों के साथ पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।