दिव्यांगों के सशक्तिकरण की दिशा में सराहनीय पहल: प्राज्ञ कॉलेज के विद्यार्थियों ने निभाई सेवाभावी भूमिका
बिजयनगर 17 जनवरी ( केकड़ी पत्रिका/तरनदीप सिह) भगवान महावीर विकलांग सहायता समिति, शाखा अजमेर एवं राजस्थान सरकार के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दिव्यांग उपकरण चिन्हीकरण शिविर समाजसेवा और मानवीय करुणा का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा। इस शिविर में श्री प्राज्ञ महाविद्यालय, बिजयनगर के विद्यार्थियों ने करुणा क्लब के तत्वाधान में निस्वार्थ भाव से सेवाएं प्रदान कर सामाजिक उत्तरदायित्व का परिचय दिया ।
शिविर का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजन एवं बुजुर्गों की पहचान कर उन्हें आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराने की दिशा में पहल करना था, जिससे वे आत्मनिर्भर जीवन की ओर अग्रसर हो सकें। शिविर में बड़ी संख्या में दिव्यांग एवं वृद्धजन पहुंचे, जिनका चयन विशेषज्ञों द्वारा किया गया। चयन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित एवं सुचारु बनाने में महाविद्यालय के विद्यार्थियों की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। करुणा क्लब से जुड़े विद्यार्थियों ने शिविर से पूर्व ही व्यापक स्तर पर जनजागरूकता अभियान चलाया। छात्रों ने टेलीफोन, व्हाट्सएप, फेसबुक सहित विभिन्न सोशल मीडिया माध्यमों का उपयोग कर आमजन तक शिविर की जानकारी पहुंचाई। इसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में जरूरतमंद लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया और शिविर का लाभ लेने पहुंचे। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, पंजीयन, दस्तावेज़ सत्यापन तथा दिव्यांगों एवं बुजुर्गों को उचित काउंटर तक पहुंचाने जैसे कार्यों में विद्यार्थियों ने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ सेवाएं दीं।

शिविर के दौरान करुणा क्लब के प्रभारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया तथा सेवाकार्यों का समन्वय सुनिश्चित किया। विद्यार्थियों में सेवा भाव, अनुशासन और संवेदनशीलता स्पष्ट रूप से देखने को मिली। दिव्यांगजनों और बुजुर्गों के प्रति छात्रों का सहयोगात्मक रवैया शिविर में आए लोगों के लिए भावनात्मक संबल भी बना।यह शिविर ज्ञानचंद सिंघवी, अध्यक्ष जैनीबाई भूरालाल चैरिटेबल ट्रस्ट, बिजयनगर के निर्देशन में आयोजित किया जा रहा है।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना ही सच्ची सेवा है। उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा किए गए कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी में सेवा और करुणा की भावना समाज के उज्ज्वल भविष्य का संकेत है। महाविद्यालय प्राचार्या डॉ. दुर्गा कंवर मेवाड़ा ने भी विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय का उद्देश्य केवल शैक्षणिक ज्ञान देना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को सामाजिक सरोकारों से जोड़कर संवेदनशील नागरिक बनाना भी है। करुणा क्लब के माध्यम से विद्यार्थी समाज के प्रति अपने दायित्वों को समझ रहे हैं और व्यवहारिक रूप से उन्हें निभा भी रहे हैं।

शिविर में आए दिव्यांगजनों एवं बुजुर्गों ने भी व्यवस्थाओं की सराहना की। उन्होंने बताया कि विद्यार्थियों के सहयोग से उन्हें किसी प्रकार की असुविधा नहीं हुई और पूरे शिविर में उन्हें अपनापन महसूस हुआ। कई लाभार्थियों ने कहा कि ऐसे शिविर उनके जीवन में आशा की नई किरण लेकर आते हैं। समाजसेवी संस्थाओं का सहयोग इस आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण रहा। यह पहल न केवल दिव्यांगों और बुजुर्गों के जीवन को आसान बनाने की दिशा में सार्थक कदम है, बल्कि युवाओं में मानवीय मूल्यों के विकास का भी प्रेरक उदाहरण है।