श्री प्राज्ञ महाविद्यालय, बिजयनगर में लोहड़ी और मकर संक्रांति महोत्सव का आयोजन
बिजयनगर 14 जनवरी (केकड़ी पत्रिका/तरनदीप सिंह) विद्यार्थियों की रचनात्मकता, उत्साह और सामूहिक सहभागिता का बना उत्सवश्री प्राज्ञ महाविद्यालय, बिजयनगर में लोहड़ी और मकर संक्रांति के पावन अवसर पर दो दिवसीय महोत्सव का भव्य एवं उल्लासपूर्ण आयोजन किया गया। यह आयोजन 13 एवं 14 जनवरी को महाविद्यालय परिसर में अत्यंत उत्साह, उमंग और सांस्कृतिक वातावरण के बीच संपन्न हुआ।
इस महोत्सव का उद्देश्य विद्यार्थियों में भारतीय संस्कृति, पारंपरिक त्योहारों के महत्व, टीम वर्क, रचनात्मकता और आनंदपूर्ण सहभागिता को बढ़ावा देना रहा। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और पूरे परिसर में उत्सव का रंग बिखेर दिया।*पहला दिन: 13 जनवरी – कैंपफायर और मनोरंजक गतिविधियाँ*दो दिवसीय महोत्सव के पहले दिन, 13 जनवरी को सायंकालीन सत्र में कैंपफायर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सर्द मौसम के बीच जलते अलाव ने पूरे वातावरण को गर्मजोशी और अपनत्व से भर दिया।
कैंपफायर कार्यक्रम की शुरुआत वार्म अप गेम्स के साथ हुई, जिसमें विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साह के साथ भाग लिया। इन खेलों का उद्देश्य विद्यार्थियों को आपस में घुलने-मिलने का अवसर प्रदान करना और कार्यक्रम के लिए ऊर्जा से भर देना था। खेलों के दौरान विद्यार्थियों की हंसी, जोश और उमंग देखने योग्य थी।इसके पश्चात म्यूजिकल चेयर गेम का आयोजन किया गया, जिसमें छात्र-छात्राओं ने पूरे जोश के साथ हिस्सा लिया। संगीत की धुनों पर बच्चो ने कुर्सियों के बीच घूमकर प्रतिस्पर्धा को रोमांचक बना दिया। जैसे ही संगीत रुकता, कुर्सी पाने की होड़ शुरू हो जाती, जिससे दर्शकों में भी उत्सुकता और मनोरंजन बना रहा। इस खेल ने विद्यार्थियों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और खेल भावना को प्रोत्साहित किया।इसके बाद सांस्कृतिक एवं बौद्धिक गतिविधि के रूप में अंत्याक्षरी का आयोजन हुआ। इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपने गीत-संगीत और शब्द ज्ञान का परिचय दिया। एक के बाद एक गीतों की प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को संगीतमय बना दिया। पुराने और नए गीतों की श्रृंखला ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया और यह गतिविधि विशेष रूप से दर्शकों की पसंद बनी।
कार्यक्रम के अंत में डीजे पार्टी का आयोजन किया गया, जिसने पहले दिन के कार्यक्रम को और भी यादगार बना दिया। डीजे की धुनों पर विद्यार्थियों ने जमकर नृत्य किया और अपनी खुशी का खुलकर इजहार किया। आधुनिक संगीत और रंगीन रोशनी के बीच विद्यार्थियों का उत्साह चरम पर था। इस प्रकार पहला दिन मनोरंजन, आपसी सौहार्द और उत्सव की भावना के साथ संपन्न हुआ। *दूसरा दिन: 14 जनवरी – मकर संक्रांति महोत्सव*महोत्सव के दूसरे दिन, 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस दिन का शुभारंभ सतौलिया के साथ हुआ। इस प्रतियोगिता में महाविद्यालय की विभिन्न टीमों ने भाग लिया। प्रतियोगिता के दौरान विद्यार्थियों ने रणनीति, एकाग्रता और टीम वर्क का शानदार प्रदर्शन किया। सभी टीमों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जिससे कार्यक्रम अत्यंत रोचक बन गया।
सतौलिया फन प्रतियोगिता के फाइनल मुकाबले में दी टाइटन ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि टीम शेरा उपविजेता रही। विजेता और उपविजेता टीमों की घोषणा होते ही पूरे परिसर में तालियों की गड़गड़ाहट गूंज उठी। यह प्रतियोगिता विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता, सहयोग और आत्मविश्वास को बढ़ाने में सफल रही। इसके पश्चात पतंग महोत्सव का आयोजन किया गया, जो मकर संक्रांति का विशेष आकर्षण रहा। खुले आकाश में रंग-बिरंगी पतंगों ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया।
विद्यार्थियों ने बड़े उत्साह के साथ पतंग उड़ाई और पारंपरिक त्योहार की खुशियों को खुले मन से मनाया। पतंग महोत्सव ने न केवल मनोरंजन प्रदान किया, बल्कि विद्यार्थियों को भारतीय संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का भी कार्य किया। फायरलेस कुकिंग: रचनात्मकता का अनोखा संगमकार्यक्रम का समापन फायरलेस कुकिंग प्रतियोगिता के साथ किया गया। इस प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने बिना गैस और आग का उपयोग किए तिल व गुड़ से स्वादिष्ट एवं आकर्षक मिठाइयां बनाई।
विद्यार्थियों की रचनात्मकता और नवाचार इस प्रतियोगिता में स्पष्ट रूप से देखने को मिली। विभिन्न प्रकार की पारंपरिक और आधुनिक मिठाइयों की प्रस्तुति ने निर्णायकों और दर्शकों को प्रभावित किया। फायरलेस कुकिंग प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को उनकी प्रस्तुति, स्वाद, स्वच्छता और नवाचार के आधार पर परखा गया। प्रतियोगिता के अंत में सर्वश्रेष्ठ तीन प्रतिभागियो को सम्मानित किया गया। यह गतिविधि विद्यार्थियों में आत्मनिर्भरता, स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और रचनात्मक सोच को प्रोत्साहित करने वाली रही। कार्यक्रम का समापन सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर किया गया l महोत्सव के दौरान महाविद्यालय प्राचार्या डॉ. दुर्गा कंवर मेवाडा का विशेष मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।
उन्होंने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक और रचनात्मक कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की और आयोजन समिति को सफल आयोजन के लिए बधाई दी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मकर संक्रांति जैसे पारंपरिक पर्व हमें एकता, सहयोग और सकारात्मकता का संदेश देते हैं।