बघेरा में परंपरागत और धूमधाम से मनाया गणगौर पर्व
बघेरा 21 मार्च( केकड़ी पत्रिका/ललित नामा) कस्बे में गणगौर पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। यह त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए करवा चौथ के व्रत जितना ही महत्वपूर्ण माना जाता है। कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर की कामना के लिए इस पर्व को मनाती हैं।इस अवसर पर महिलाओं ने सज-धज कर बाग-बगीचों से पानी के कलश सिर पर रखकर अपने घर लाईं।
इसके बाद ईशर गणगौर का भव्य जुलूस निकाला गया। विवाह के पूरे रीति-रिवाजों के साथ ईशर गणगौर की माला व तोरण मरवाकर प्रतीकात्मक शादी करवाई गई।यह जुलूस वाराह मंदिर प्रांगण से शुरू होकर जाट मोहल्ले और सदर बाजार होते हुए पाराशर मोहल्ला पहुंचा। वहां ईशर गणगौर की भव्य बारात निकाली गई और गाजे-बाजे के साथ नाचते हुए वरमाला का कार्यक्रम संपन्न हुआ।
गणगौर एक ऐसा पर्व है जिसमें कुंवारी कन्याएं और विवाहित महिलाएं दोनों भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करती हैं। ऐसी मान्यता है कि शादी के बाद पहला गणगौर पूजन मायके में किया जाता है।इस पूजन का महत्व अविवाहित कन्याओं के लिए अच्छे वर की कामना से जुड़ा है, जबकि शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए यह व्रत करती हैं।
अविवाहित कन्याएं पूरी तरह से तैयार होकर और शादीशुदा महिलाएं सोलह श्रृंगार करके पूरे सोलह दिन विधि-विधान से पूजन करती हैं।इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की मिट्टी की मूर्तियां बनाकर उनकी पूजा करती हैं। इस पर्व को गौरी तृतीया के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती।