मानव जीवन बहुत ही दुर्लभता से प्राप्त होता है इसे सद्कार्यों में लगाना चाहिए -महामुनि श्री विकसंत सागर महाराज
केकड़ी 28 फरवरी (केकड़ी पत्रिका) मानव जीवन बहुत ही दुर्लभता से प्राप्त होता है, इसलिए इसे सद्कार्यों में लगाना चाहिए ।अपने जीवन मे ब्रह्मचर्य व्रत, रसना इंद्रियों के प्रति अनाशक्ति,एवं मोहनीय कर्मइ नको जीत लिया तो मानव विश्व विजय को प्राप्त कर सकता है । बोहरा कॉलोनी स्थित श्री नेमिनाथ मंदिर के संत भवन में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान गणाचार्य श्री विराग सागर महाराज के सुशिष्य महामुनि श्री विकसंत सागर महाराज ने अपने प्रवचन के दौरान कहे,उन्होंने कहा कि जो धर्म का पालन करते है देव भी उनकी रक्षा करते है ।अपनी बेटी को जहरीले नाग के काटने पर भी सेठ धनञ्जय भगवान की भक्ति से विचलित नहीं हुए ओर प्रभु पूजा नहीं छोड़ी, परिणाम यह हुआ कि विष भी निर्विष हो गया ओर उसकी बेटी की जान बच गई ।
इसलिए हमेसा निःस्वार्थ भाव से भगवान की भक्ति आराधना करनी चाहिये जिसके फल से जीवन सुखमय बना रहता है।समाज के अध्यक्ष ज्ञान चंद जैन ज्वैलर्स व मंत्री कैलाश जैन मावा वालों ने बताया कि सिद्धचक्र महामंडल विधान में आज प्रभु के चरणो में 128 श्री फल सहित अर्घ्य समर्पित किये गये। प्रातः जिनाभिषेक, शान्तिधारा एवं नित्य नियम पूजा मुनि श्री के सानिध्य में सम्पन्न हुए ।सिद्ध चक्र महामंडल विधान मुनि ससंघ के सानिध्य एवं पंडित निकेत शास्त्री एवं बाल ब्रह्मचारिणी देशना दीदी के निर्देशन में हो रहे है ।रमेश बंसलपारस जैनमीडिया प्रभारी