पुण्यशाली जीव ही मनुष्य जीवन को प्राप्त कर पाते है : महामुनि श्री विकसंत सागर महाराज
केकड़ी 27 फरवरी (केकड़ी पत्रिका/अम्बा लाल गुर्जर) पुण्यशाली जीव ही मनुष्य जीवन को प्राप्त कर पाते है, इसलिए मानव जीवन का सही सदुपयोग कर लेना चाहिए। मनुष्य को अपने जीवन में कभी भी प्रभु , गुरु और माता-पिता इन तीनों का कभी अनादर-नहीं करना चाहिए!बोहरा कॉलोनी स्थित श्री नेमिनाथ मंदिर के संत भवन में श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान के दौरान गणाचार्य श्री विराग सागर महाराज के सुशिष्य महामुनि श्री विकसंत सागर महाराज ने अपने प्रवचन के दौरान कहे,उन्होंने कहा कि सुखी रहने के लिए देवपूजा, गुरु उपासना एवं माता-पिता की सेवा करना चाहिए ये तीनो ही नेक कार्यतीन लोक के सुख के साधन है।
देव,गुरु ओर माता- पिता इन तीनो का अनादर करने से जन्म जन्मान्तर तक कष्ट भोगना पड़ता है। श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान भक्ति का महोत्सव है इससे पुण्य का संचय होता है। प्रभु की भक्ति के लिए देवता भी अष्टान्हिका पर्व में मध्य लोक में आकर आराधना करते हैं। हम सौभाग्यशाली एवं पुण्यशाली है जो प्रभु भक्ति से आराधना कर आनन्द प्राप्त कर रहे।समाज के अध्यक्ष ज्ञान चंद जैन ज्वैलर्स व मंत्री कैलाश जैन मावा वालों ने बताया कि सिद्धचक्र महामंडल विधान में आज प्रभु के चरणो में 64 श्री फल सहित अर्घ्य समर्पित किये गये। प्रातः जिनाभिषेक, शान्तिधारा एवं नित्य नियम पूजा मुनि श्री के सानिध्य में सम्पन्न हुए ।सिद्ध चक्र महामंडल विधान मुनि ससंघ के सानिध्य एवं पंडित निकेत शास्त्री एवं देशना दीदी के निर्देशन में हो रहे है ।रमेश बंसलपारस जैनमीडिया प्रभारी