आसींद: तोषनीवाल परिवार के फागोत्सव में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, सांवरिया संग खेली फूलों की होली
आसींद 27 फरवरी (केकड़ी पत्रिका/विजयपाल सिंह राठौड़ फागुन की मस्ती और भक्ति के रंग अब परवान चढ़ने लगे हैं। इसी क्रम में गुरुवार दोपहर कस्बे की श्रीमाल कॉलोनी स्थित कैलाश तोषनीवाल के निवास पर फागोत्सव का भव्य और गरिमामय आयोजन किया गया। तोषनीवाल परिवार द्वारा आयोजित इस उत्सव ने पूरी कॉलोनी को ‘नंदगांव’ के रंग में रंग दिया।सांवरिया की मनमोहक झांकी और भजनों की बयार आयोजन की शुरुआत तोषनीवाल परिवार द्वारा भगवान राधा-कृष्ण और सांवरिया सेठ की मनमोहक झांकी सजाकर की गई।
जैसे ही “झिणी-झिणी उड़े रे गुलाल, होली खेले सांवरियो” के स्वर गूंजे, श्रद्धालु महिलाएं भक्ति के सागर में गोते लगाने लगीं। भगवान के भजनों पर थिरकते कदमों और हाथ में गुलाल लिए महिलाओं ने सांवरिया संग होली खेलकर इस उत्सव को जीवंत कर दिया।फूलों और अबीर की वर्षा, नृत्य की रही धूमतोषनीवाल परिवार के इस आयोजन में केवल रंगों का ही नहीं, बल्कि श्रद्धा के फूलों और अबीर का भी अनूठा संगम देखने को मिला। “भोला भांग पी लो, भोला भांग पी लो” जैसे फागुनी गीतों पर महिलाएं झूम उठीं।
ढोल की थाप और चंग की गूंज के बीच महिलाओं द्वारा प्रस्तुत किए गए सुंदर नृत्य ने समां बांध दिया। वातावरण पूरी तरह से केसरिया और गुलाबी रंग की आभा से महक उठा।इनकी रही गरिमामय उपस्थितितोषनीवाल परिवार के इस स्नेहिल आमंत्रण पर कस्बे की अनेक मातृशक्तियां सम्मिलित हुईं। इस अवसर पर:सुनीता तोषनीवाल, नेहा तोषनीवाल, जील तोषनीवालप्रीति साहू, विद्या श्रीमाल, अर्चना मेवाड़ामीना सोनी, किरण टेलर, दीपिका टेलरदीपिका वर्मा, दुर्गा शर्मा, सीता शर्मा और किरणसहित अनेक महिलाएं उपस्थित रहीं, जिन्होंने तोषनीवाल परिवार के इस सुंदर आयोजन की सराहना की और एक-दूसरे को फाग की बधाई दी।प्रमुख विशेषताएँ:मुख्य आयोजक: कैलाश तोषनीवाल एवं परिवार।विशेष आकर्षण: सांवरिया सेठ की झांकी, ढोल पर नृत्य और पुष्प वर्षा।
भजन और फाग गीतों की स्वरलहरियांउत्सव का मुख्य आकर्षण फाग के पारंपरिक गीत रहे। जैसे ही सुर छेड़े गए— “झिणी-झिणी उड़े रे गुलाल, होली खेले सांवरियो”, पूरा परिसर सांवरिया की भक्ति में डूब गया। इसके साथ ही महिलाओं ने शिव-भक्ति से सराबोर गीत “भोला भांग पी लो, भोला भांग पी लो” और “फागण आयो रे…” जैसे गीतों को गाकर वातावरण को पूरी तरह फागुनी रंग में सराबोर कर दिया। ढोलक और मजीरों की जुगलबंदी ने भजनों में जान फूंक दी।नृत्य और भक्ति का अनूठा संगमगीतों की मस्ती ऐसी थी कि महिलाएं खुद को थिरकने से रोक नहीं पाईं। ढोल की थाप पर महिलाओं ने बहुत ही सुंदर और पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किया।
हाथों में गुलाल और फूलों की टोकरियाँ लिए, नाचती-गाती महिलाओं ने साक्षात वृंदावन की होली का दृश्य जीवंत कर दिया। चंग की गूंज और उस पर झूमती मातृशक्ति ने इस उत्सव को यादगार बना दिया। भगवान कृष्ण की झांकी के समक्ष यह सामूहिक नृत्य श्रद्धा और उल्लास का अद्भुत मेल था।तोषनीवाल परिवार का आतिथ्य और फूलों की होलीआयोजक तोषनीवाल परिवार ने न केवल सुंदर झांकी सजाई, बल्कि अबीर, गुलाल और फूलों की होली के साथ सभी का मन मोह लिया।