67 वीं सेना परेड में दिखा शौर्य, अनुशासन और आधुनिक सैन्य शक्ति का विराट स्वरूप प्राज्ञ ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूशंस के 50 शिक्षक–शिक्षिकाओं ने विशेष आमंत्रण पर किया प्रत्यक्ष अवलोकन
बिजयनगर 15 जनवरी (केकड़ी पत्रिका/तरनदीप सिंह) भारतीय सेना की 67वीं भव्य सेना परेड राष्ट्र की सैन्य क्षमता, अनुशासन और तकनीकी सामर्थ्य का सजीव प्रतीक बनकर सामने आई। इस ऐतिहासिक परेड का प्रत्यक्ष अवलोकन प्राज्ञ (Pragya) ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूशंस के लगभग 50 शिक्षक–शिक्षिकाओं ने किया। यह सहभागिता परेड समन्वयक एवं सचिव IAS नवीन जैन के विशेष आमंत्रण पर संभव हुई, जिसे संस्थान ने शैक्षिक एवं राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा गौरवपूर्ण अवसर बताया।
परेड की शुरुआत अनुशासित पैदल टुकड़ियों की सटीक कदमताल से हुई, जिसने सेना की प्रशिक्षण क्षमता और समन्वय का प्रभावी परिचय दिया। इसके बाद भैरव (Bherav) आर्मी दस्तों की सशक्त उपस्थिति ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। सैनिकों का आत्मविश्वास, सुदृढ़ गठन और युद्ध-तत्पर मुद्रा राष्ट्र की सुरक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शा रही थी।परेड का प्रमुख आकर्षण सेना का मोटरसाइकिल दस्ता रहा, जिसमें सैनिकों ने तेज़ गति, संतुलन और अनुशासन के साथ जटिल करतब प्रस्तुत किए। तिरंगे के साथ मोटरसाइकिलों पर किया गया यह प्रदर्शन साहस, कौशल और टीमवर्क का अद्भुत उदाहरण रहा, जिस पर दर्शकों ने तालियों के साथ उत्साह व्यक्त किया।
आधुनिक हथियारों और सैन्य संसाधनों के प्रदर्शन ने परेड को और भी प्रभावशाली बना दिया। इसमें उन्नत राइफलें, आर्टिलरी सिस्टम, मिसाइल-आधारित हथियार मंच, बख्तरबंद वाहन, तेज़-गति सामरिक मोटरसाइकिलें तथा आधुनिक संचार प्रणालियाँ शामिल रहीं। यह प्रदर्शन सेना के “भराव” अर्थात् संसाधन-संपन्नता—मानवबल, प्रशिक्षण, तकनीक और रणनीतिक तैयारी—को स्पष्ट रूप से रेखांकित करता नजर आया।सेना के सुसज्जित बैंड द्वारा प्रस्तुत देशभक्ति धुनों ने वातावरण को ओजस्वी बना दिया। परेड के दौरान सेना की विभिन्न रेजीमेंट्स के तालमेल, अनुशासन और युद्ध-तैयारी ने यह संदेश दिया कि भारतीय सेना हर परिस्थिति में राष्ट्र की रक्षा के लिए पूर्णतः सक्षम और सजग है।प्राज्ञ ग्रुप ऑफ़ इंस्टिट्यूशंस के शिक्षकों ने इस अनुभव को अत्यंत प्रेरणादायी बताया। उनका कहना था कि इस प्रकार के आयोजनों का प्रत्यक्ष अनुभव विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, नेतृत्व, साहस और कर्तव्यबोध जैसे मूल्यों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
शिक्षकगण इस अनुभव को कक्षा शिक्षण से जोड़ते हुए विद्यार्थियों तक भारतीय सेना के शौर्य और बलिदान की भावना पहुंचाने का संकल्प लेकर लौटे।संस्थान प्रबंधन ने इस गरिमामय अवसर के लिए आयोजकों एवं IAS नवीन जैन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसी पहलें शिक्षा और राष्ट्र के बीच जीवंत सेतु का कार्य करती हैं। 67वीं सेना परेड न केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन रही, बल्कि राष्ट्रीय गौरव, एकता और आत्मविश्वास का सशक्त संदेश भी बनी।