“नव वर्ष की पूर्व संध्या पर हमें अपने पूरे वर्ष के कर्मों का लेखा जोखा तैयार करना है”-आचार्य श्री
केकड़ी 31 दिसंबर (केकड़ी पत्रिका/अम्बा लाल गुर्जर)नव वर्ष की पूर्व संध्या पर हमें अपने पूरे वर्ष के कर्मों का लेखा जोखा तैयार करना है ।इस वर्ष में कितना दान किया, कितना धर्म किया कितना पाप किया कितना पुण्य किया,इन सभी कार्यों की एक सूची बनानी है ।जो अच्छे कार्य इस वर्ष में करने बाकी रह गए है,अगले वर्ष में इसे निश्चित रूप से पूर्ण करना है ।जो गलत कार्य पाप का बंध इस वर्ष में हो गया है , उसके लिए पश्चाताप करके नियम लेना है कि नव वर्ष में ऐसा कभी नहीं हो ।

नव वर्ष के एक दिन पूर्व आचार्य प्रज्ञा सागर महाराज ने अपने प्रवचन के दौरान कहे ।उन्होंने कहा कि डॉक्टर को अपने मरीज के लिए, माता पिता को अपने बच्चों के लिए ओर गुरु को अपने शिष्यों के भविष्य के लिए निर्दयी होना पड़ता है ।गुस्सा अपनों को सुधारने के लिए किया जाता है ।मरीज पर गुस्सा करके निर्दयी बनकर उसका इलाज करने के बाद वही मरीज उस डॉक्टर को भगवान मानने लग जाता है ।दूध ओर पानी का उदाहरण देते हुए महामुनिराज ने बताया कि पानी और दूध दोनो को गरम करो, दूध उबलकर बाहर निकलता रहता है और समाप्त हो जाता है जबकि पानी गर्म होकर भी बाहर नहीं निकलता है ।गुस्सा मानव प्रवृति है परंतु पानी की तरह हो ज्यादा उफनकर अपना अस्तित्व समाप्त नहीं करना चाहिए ।
सांयकालीन कार्यक्रम
समाज के अध्यक्ष ज्ञान चंद जैन ज्वैलर्स व मंत्री कैलाश जैन (मावा) वालो ने बताया कि आनंदयात्रा के पश्चात आचार्यश्री द्वारा प्रश्नमंच का आयोजन किया गया तथा महाआरती की गई ।प्रातःकालीन जिनाभिषेक,नित्यनियम पूजा, शान्तिधारा का आयोजन आचार्यश्री के सानिध्य में किया गया । भगवान नेमिनाथ के शान्तिधारा का पुण्यार्जन ज्ञान चंद सुनील कुमार जैन ज्वैलर्स ने प्राप्त किया ।

चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन व पाद प्रक्षालन व शास्त्र भेंट
आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज के चित्र अनावरण व दीप प्रज्ज्वलन भाग चंद ज्ञान चंद जैन कुमार विनय कुमार सोनू मोनू सावर परिवार ने किया ।आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य हगामी लाल हेमराज जैन बड़गांव वालो ने प्राप्त किया ।आचार्य श्री को शास्त्र भेंट राजेश कुमार कमलेश कुमार मनोहरपुरा वालों ने किया ।
