राष्ट्र का उत्थान ही सच्चे कार्यकर्ता का ध्येय : हुलासचंद संस्कृत और संस्कृति के संरक्षण से ही भारत बनेगा श्रेष्ठ
केकड़ी 28 दिसम्बर (केकड़ी पत्रिका/अम्बा लाल गुर्जर) संस्कृत भारती, चित्तौड़ प्रांत द्वारा पटेल आदर्श विद्या निकेतन में 25 दिसंबर से चल रहे आवासीय ‘प्रबोधन वर्ग’ में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए जयपुर से पधारे संस्कृत भारती के अखिल भारतीय अभिलेखागार प्रमुख हुलासचंद ने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया।
उन्होंने संगठन की शक्ति और दायित्वबोध पर जोर देते हुए कहा कि भारत को पुनः विश्व गुरु और श्रेष्ठ बनाने का मार्ग संस्कृत और हमारी परंपराओं से होकर गुजरता है। संघे शक्ति कलियुगे: संगठन ही कृष्ण का रूप कलियुग में संगठन की महत्ता बताते हुए उन्होंने कहा कि ‘संघे शक्ति कलियुगे’ के मंत्र के अनुसार, आज भगवान कृष्ण ‘संघ’ यानी संगठन के रूप में प्रकट होते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं को सीख दी कि:भारत के अस्तित्व का प्रमाण हमारे संस्कृत ग्रंथ, तीर्थस्थान, मंदिर और उत्सव हैं।

इन सबको गहराई से समझने के लिए संस्कृत भाषा को जानना अनिवार्य है।कार्यकर्ताओं को स्वयं संस्कृत सीखनी चाहिए और नए लोगों को प्रशिक्षण व भाषा अभ्यास के माध्यम से जोड़ना चाहिए।
निस्वार्थ सेवा और दायित्व बोध
अखिल भारतीय अभिलेखागार प्रमुख ने कार्यकर्ताओं को कार्यशैली के गुण सिखाते हुए कहा कि संगठन का कार्य वास्तव में देश का कार्य है और यह हमारा अपना भाव होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यकर्ताओं को प्रशंसा की चाह रखे बिना निरंतर कार्य करना चाहिए। साथ ही, उन्होंने ‘करणीय’ (क्या करना चाहिए) और ‘अकरणीय’ (क्या नहीं करना चाहिए) के बीच भेद की समझ विकसित करने पर भी जोर दिया।
कार्यक्रम में चित्तौड़ प्रांत के विभिन्न संभागों से आए 177 संभागी प्रतिदिन संस्कृत के साथ साथ संघटन के गुण भी सीख रहे हैं। वर्गाधिकारी डॉ हरिओम शरण शर्मा व प्रांत मंत्री डॉ मधुसूदन शर्मा ने बताया कि इस अवसर पर अध्यक्षता प्रांताध्यक्ष महेशचंद्र शर्मा ने की तथा अनिरुद्ध सिंह, देवराज कुमावत, ममता, शोभा कंवर, कचरू सिंह, दिनेश शर्मा, प्रकाश, गौरव, तनु, दीपांशी, राकेश, टीकमचंद, भागचंद, सुखराज, सुरेश, सुरेंद्र,सचिन, राजेश, पृथ्वीराज, प्रवीण , मोहित आदि शिक्षकों प्रबंधकों सहित अनेकों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।