5 March 2026

नियमों की लक्ष्मणरेखा पार करने वाला व्यक्ति कभी सुखी नहीं रह सकता -आचार्य प्रज्ञा सागर महा मुनिराज

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केकड़ी 28 दिसम्बर ( केकड़ी पत्रिका/अम्बा लाल गुर्जर) सीता माता ने नियमों की मर्यादा का (लक्ष्मण रेखा) का उलंघन किया तो जीवन भर आंसू बहाने पड़े ।समय पर सोना, समय पर उठाना, सुबह शाम समय पर भोजन करना, इन छोटे छोटे नियमो का पालन करने से जीवन सुखी रहता है ।

नियमों की लक्ष्मणरेखा पार करने वाला व्यक्ति कभी सुखी नहीं रह सकता ।नव वर्ष पश्चिमी देशों की तर्ज पर मनाने के विरोध में कहा कि सूर्य पूर्व में उगता है तो चमकता दमकता रहता है, ओर जब वह पश्चिम की ओर जाता है तो उसे अस्त होना पड़ता है ओर अंधेरे में डूब जाता है ।हमें पश्चिम में पाश्चात्य संस्कृति में जाकर डूबना नहीं है, बल्कि नववर्ष का स्वागत पूर्वी संस्कृति धर्म कर्म के साथ मनाकर चमकना है

सांयकालीन आनंद यात्रा के दौरान आचार्य प्रज्ञा सागर महा मुनिराज ने अपने प्रवचन के दौरान कहे ।समाज के अध्यक्ष ज्ञान चंद जैन ज्वैलर्स व मंत्री कैलाश जैन (मावा) वालो ने बताया कि आनंद यात्रा के पश्चात आचार्य श्री द्वारा प्रश्नमंच का आयोजन किया गया तथा महाआरती की गई ।प्रातःकालीन जिनाभिषेक,नित्यनियम पूजा, शान्तिधारा का आयोजन आचार्य श्री के सानिध्य में किया गया ।

चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन व पाद प्रक्षालन आचार्य पुष्पदंत सागर महाराज के चित्र अनावरण व दीप प्रज्ज्वलन पदम चंद सेठी परिवार ने किया ।आचार्य श्री के पाद प्रक्षालन का सौभाग्य कैलाश चंद प्रकाश चंद पीयूष कुमार मावा वालों ने प्राप्त किया ।मंगल प्रवचन”राजा राणा छत्रपति हाथिन के असवार मरना सबको एक दिन अपनी अपनी बार”राजा ऋषभदेव ने जब नृत्य करती हुई नीलांजना की मृत्यु को नजदीक से देखा तो उन्हें वैराग्य हो गया ।उन्होंने सोचा कि चाहे राजा हो राणा हो या छत्रपति महाराज हो ,एक दिन अपना समय आने पर सबको मरना है, तो फिर यह मोह माया क्यों ।ऋषभदेव ने उसी क्षण मिथ्यात्व का त्याग कर वैराग्य धारण कर मोक्ष मार्ग पर चल पड़े व मोक्ष प्राप्त कर भगवान ऋषभदेव बने ।आचार्य श्री ने कहा कि मिथ्यात्व में हम रास्ता भटक जाते है, जन्म जरा मृत्यु में फसे हुए रहते है ।

अपने जीवन का कल्याण करना है तो मिथ्यात्व का त्याग कर सम्यक्त्व की औषधि ग्रहण करनी होगी ।छोटे छोटे नियम लेकर हम अपने जीवन को परिवर्तित कर सकते है ।अपरिग्रह पर उन्होंने बताया कि जो वस्तु हमारे जीवन मे कभी काम नहीं आयी ओर भविष्य में कभी काम आने की संभावना नहीं है, उस वस्तु का भी नियम से हमेशा के लिए त्याग करने से पुण्य का बंध होता है ।स्थानीय विधायक शत्रुघ्न गौतम ने आचार्य श्री के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया ।

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