भागवत कथा में उमड़ा जन समूह,विष्णु सहस्त्रनाम के पूर्णिमा और अमावस्या पर जप का विशेष महत्व: संत उमा शंकर दास
बिजयनगर 27 दिसंबर (केकड़ी पत्रिका/तरनदीप सिंह ) स्थानीय मसूदा रोड स्थित प्रभु की बगिया में जगन्नाथ सेवा मंडल के सान्निध्त में पिछले तीन दिनों से चल रही भागवत कथा के दौरान अयोध्या के संत गौ भक्त उमाशंकर दास महाराज ने कहा कि सहस्त्रनाम के नियमित पाठ का वैसे तो धर्म और लाभ मिलता है, मगर अमावस्या और पूर्णिमा पर किए जाने वाले पाठ का विशेष महत्व हैं ।
परिक्रमा और दर्शन का महत्व
उमाशंकर दास महाराज ने कहा कि इसी तरह कोई भी व्यक्ति चित्रकूट स्थित कामतानाथ की परिक्रमा और दर्शन करे तो उसके पाप कर्म और दुख शिथिल होता है। मगर मन, बुद्धि, चित्त और ईश्वर का ध्यान रखना चाहिए। अवगुण से बचने का आह्वान करते महाराज ने कहा कि जुए में हारने पर भगवत में प्रसंग आता है कि एक राजा को पत्नी दाव पर लगाना पड़ा। धर्म किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता केवल व्यक्ति अपने कर्म से दुख पाता है। मतलब कोई किसी को कोई दुख नहीं पहुंचाता दूसरे में दोष पहुंचाने से कष्ट भुगतना पड़ता है।
राम नाम का प्रभाव
उन्होंने राम नाम का महत्व बताते हुए कहा कि राम नाम के प्रभाव से कलयुग नहीं सताता है। जो राम नाम जपता है उसका कल्याण ही होगा। उन्होंने कहा कि पांच वस्तुओं में कलयुग का वास होता है। जिनका विस्तार प्रसंग भी बताया। इसके साथ ही साधु संतों के प्रभाव पर बताते हुए कहा कि सच्चे संत के सानिध्य से वर्तमान के साथ ही अगले जन्म में भी कल्याण होता है। साथ ही उमाशंकर दास महाराज ने कहा कि कथा श्रवण और आयोजन से व्यथा समाप्त होती है। कथा के दौरान ” इतना तो करना स्वामी जब प्राण तनसे निकले भजन पर श्रद्धालु झूम उठे। रविवार को कृष्ण जन्म का प्रसंग आने पर जन्मोत्सव उत्साह से मनाया जाएगा।