संस्कृत भाषा के विकास से ही राष्ट्र का पुनर्निर्माण : कमल शर्मा
केकड़ी 26 दिसम्बर (केकड़ी पत्रिका/हंसराज खारोल) शहर में संस्कृत भारती का प्रान्तीय ‘भाषा बोधन एवं प्रबोधन वर्ग’ जारी, 15 जिलों के छात्र ले रहे भाग केकड़ी। स्थानीय शहर में इन दिनों संस्कृत की गूँज सुनाई दे रही है। घर के सुख-सुविधाओं का त्याग कर आधे राजस्थान के सैकड़ों छात्र यहाँ संस्कृत संभाषण का कठिन तप कर रहे हैं। संस्कृत भारती द्वारा आयोजित इस विशेष शिविर में भाग लेने वाले छात्र सुबह 5 बजे से रात 10 बजे तक पूर्णतः ‘संस्कृतमय’ वातावरण में रहकर भाषा का अभ्यास कर रहे हैं।
संस्कृत का कार्य ईश्वरीय कार्य:
मुख्य वक्ता शिविर के मुख्य वक्ता एवं क्षेत्र संगठन मंत्री कमल शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि इस शिविर में आना ईश्वर की प्रेरणा और सौभाग्य की बात है। उन्होंने जोर देकर कहा, “संस्कृत का कार्य केवल भाषा का विकास नहीं, अपितु राष्ट्र के पुनर्निर्माण का कार्य है।” उन्होंने संस्कृत को ‘मृत्युंजय भाषा’ बताते हुए कहा कि आज भारत में 17 और विदेशों में भी संस्कृत विश्वविद्यालय संचालित हैं, जो सिद्ध करता है कि संस्कृत सर्वत्र है। यह समर्थ भारत के निर्माण का सोपान है।
संस्कृत भारती का प्रयास स्तुत्य:
जगदीशपुरी महाराज कार्यक्रम के मुख्य अतिथि 1008 श्री जगदीशपुरी महाराज (शक्करगढ़) ने आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि संस्कृत को पुनः लोकभाषा बनाने हेतु संस्कृत भारती द्वारा किया जा रहा यह प्रयास अत्यंत सराहनीय और स्तुत्य है।15 जिलों के 177 शिक्षार्थी ले रहे प्रशिक्षण सारस्वत अतिथि एवं क्षेत्र मंत्री तगसिंह राजपुरोहित ने वर्ग का परिचय देते हुए बताया कि राजस्थान में इस समय तीन स्थानों पर वर्ग चल रहे हैं।
केकड़ी में आयोजित इस वर्ग में 18 में से 15 जिलों के कुल 177 शिक्षार्थी भाग ले रहे हैं, जिन्हें 30 अनुभवी शिक्षक प्रशिक्षित कर रहे हैं। संभाषण शिविर, भाषा बोधन और प्रबोधन के इन सोपानों को पार कर यही छात्र भविष्य में संस्कृत के कार्यकर्ता बनकर समाज में कार्य करेंगे।

प्रबोधन वर्ग के संयोजक डॉ हरिओम शरण शर्मा व प्रांत प्रचार प्रमुख तरुण मित्तल ने बताया कि उद्घाटन कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रांताध्यक्ष महेशचंद्र शर्मा ने की तथा सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया।विशिष्ट उपस्थिति स्वामीजी के शिष्य नारायण जी एवं पत्रकार सुरेंद्र जी रहे।वर्ग गीत की मधुर प्रस्तुति सुधांशु द्वारा दी गई। कार्यक्रम का कुशल संचालन प्रांत प्रशिक्षण प्रमुख डॉ. मीठालाल माली ने किया। इससे पूर्व प्रांत मंत्री डॉ मधुसूदन शर्मा ने सभी अतिथियों का परिचय करवाया और डॉ श्यामसुंदर पारीक ने वैदिक मंगलाचरण किया। स्वागत डॉ मानाराम चौधरी ने किया। यह शिविर छात्रों के लिए न केवल भाषा सीखने का माध्यम बना है, बल्कि यह उनके व्यक्तित्व विकास और सांस्कृतिक जुड़ाव का भी केंद्र बन गया है।
