31 August 2025

मतदाता सूची की शुद्धि: राष्ट्रहित में एक आवश्यक कदम , न की राजनीतिक हथियार

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अराई 30 अगस्त (केकड़ी पत्रिका/संजीव पाराशर ) भारतीय जनता पार्टी अजमेर शहर जिला अध्यक्ष रमेश सोनी एवं भाजपा अजमेर शहर जिला प्रवक्ता श्यामसुंदर वैष्णव ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि राजस्थान में चल रहे विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) कार्यक्रम पर कांग्रेस और विशेषकर राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवाल न केवल दुर्भाग्यपूर्ण हैं, बल्कि देश की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने का एक प्रयास भी हैं। हमारा स्पष्ट मानना है कि यह कार्यक्रम भारतीय लोकतंत्र की शुचिता और पारदर्शिता के लिए अत्यंत आवश्यक है, और इसका विरोध पूरी तरह से निराधार है।

एसआईआर: लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने की प्रक्रियाविशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके तहत मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची में केवल उन्हीं लोगों के नाम हों जो वास्तव में वोट देने के योग्य हैं। इसमें मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं, डुप्लिकेट नामों को पहचाना जाता है, और नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जाते हैं। यह प्रक्रिया भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत अपनी शक्तियों का उपयोग करते हुए चलाई जाती है, जो इसे चुनावों का संचालन, निर्देशन और नियंत्रण करने का अधिकार देता है।

राहुल गांधी और कांग्रेस का यह आरोप कि यह मतदाताओं को परेशान करने के लिए है, हास्यास्पद है। क्या वे चाहते हैं कि मतदाता सूची में उन लोगों के नाम भी हों जिनकी मृत्यु हो चुकी है? या क्या वे फर्जी मतदाताओं के साथ एक भ्रष्ट प्रणाली का समर्थन करते हैं? अगर नहीं, तो उन्हें इस प्रक्रिया का विरोध क्यों करना चाहिए?एक मजबूत लोकतंत्र की नींव एक निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया पर टिकी होती है, और इसकी शुरुआत एक साफ-सुथरी मतदाता सूची से होती है। जब सूची में गलतियाँ होती हैं, तो इससे चुनाव में धांधली की संभावना बढ़ जाती है। एसआईआर जैसी प्रक्रियाएं सुनिश्चित करती हैं कि प्रत्येक वोट का सही मूल्य हो। जैसा कि रमेश सोनी और श्यामसुंदर वैष्णव ने बताया, यह सुनिश्चित करती है कि लोकतंत्र में “एक व्यक्ति, एक वोट” का सिद्धांत वास्तव में लागू हो।राहुल गांधी का दोहरा मापदंड और राष्ट्रहितराहुल गांधी का एसआईआर का विरोध उनके राजनीतिक पाखंड को दर्शाता है।

एक तरफ, वह भारत जोड़ो यात्रा निकालकर लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की बात करते हैं, और दूसरी तरफ, वह उसी लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया—यानी मतदाता सूची की शुद्धि—का विरोध कर रहे हैं।कांग्रेस शासित राज्यों में, जहां चुनाव आयोग इसी तरह की प्रक्रियाएं चलाता है, वहां कांग्रेस इसका विरोध नहीं करती। लेकिन जैसे ही यह प्रक्रिया किसी ऐसे राज्य में शुरू होती है जहां भाजपा सत्ता में है, कांग्रेस इसे राजनीतिक रंग देना शुरू कर देती है। यह स्पष्ट रूप से दिखाता है कि राहुल गांधी और कांग्रेस के लिए लोकतंत्र से ज्यादा अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं महत्वपूर्ण हैं।यह समझना महत्वपूर्ण है कि एसआईआर कोई नया या अनोखा कार्यक्रम नहीं है। यह हर चुनाव से पहले नियमित रूप से चलाया जाता है। धारा 171 के तहत यह प्रक्रिया भारत सरकार के चुनाव आयोग के निर्देश पर होती है और इसका उद्देश्य आगामी परिसीमन और जनगणना के लिए भी सटीक डेटा तैयार करना है।निष्कर्ष अंत में, जैसा कि रमेश सोनी और श्यामसुंदर वैष्णव ने जोर देकर कहा, हम राहुल गांधी से आग्रह करते हैं कि वे इस तरह के बेबुनियाद आरोप लगाना बंद करें और देश के लोकतांत्रिक संस्थानों पर विश्वास करें। एसआईआर मतदाताओं को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि उन्हें सशक्त बनाने के लिए है। यह भारत की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए एक आवश्यक कदम है।हम सभी को, चाहे हम किसी भी राजनीतिक दल से हों, इस प्रक्रिया का समर्थन करना चाहिए। यह हमारे लोकतंत्र के स्वास्थ्य और भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। एक स्वच्छ और पारदर्शी चुनाव प्रणाली ही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है।

अजमेर जिले में यह कार्यक्रम 20 अगस्त से 19 अक्टूबर तक चल रहा है। कल किशनगढ़ प्रवास के दौरान भाजपा अजमेर शहर जिला अध्यक्ष रमेश सोनी ने सभी भाजपा कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि विश्व की सबसे बड़े लोकतांत्रिक प्रक्रिया के एक भाग के रूप में कार्य कर जनता को जागरूक करें और निर्वाचन आयोग के इस कार्य को सुचारू रूप से सफल बनाने में अपना योगदान सुनिश्चित करें।

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