हर पल हर जीव के प्रति दया के भाव हो यही सबसे बड़ा धर्म है: धैर्य मुनि

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आसींद 08 अगस्त( केकड़ी पत्रिका/ विजयपाल सिंह राठौड़) जीवन में हर पल जीवों के प्रति दया करने के भाव रहे। जिसके जीवन में करुणा और दया होती है वह व्यक्ति सबसे पुण्यवान होता है। अपने विवेक से कार्य करते हुए जीवों को अभयदान देना पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। किसी की आत्मा को दुखाया है तो उसके परिणाम काफी गंभीर होते है। किसी को सता कर जीवन में आगे बढ़ने का प्रयास नहीं करे। जिस परिवार में दया की भावना हो वह परिवार स्वर्ग बन जाता है। सबसे बड़ा कोई धर्म है तो वह दया धर्म है। उक्त विचार नवदीक्षित संत धैर्य मुनि ने महावीर भवन में आयोजित धर्मसभा में व्यक्त किए।
प्रवर्तिनी डॉ दर्शन लता ने धर्मसभा में कहा कि हर क्षण हमारे साथ 7 -8 कर्मों का बंध चलता है। हर क्रिया में कर्म जुड़े हुए है। जीवन में हम ऐसे कर्म नहीं करे जिसकी पीड़ा हमे भुगतनी पड़े। कर्म सता किसी को भी छोड़ती नहीं है, पूरे ब्याज सहित वसूलती है। तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी को भी कर्म सता ने नहीं छोड़ा था उनके भी कानो में खीलें ठोके गए, गोशालक ने उन्हें परेशान किया था। जितना संभव हो सके पाप के कार्यों से डरे और उन्हें नहीं करे। इस संसार में अहोभाव से देने वाले और अहोभाव से लेने वाले दुर्लभ रूप से मिलते है। देने वाला और लेने वाला दोनों शुद्ध हो तो वह अमृत बन जाता है।
साध्वी ऋजु लता ने कहा कि संसार में व्यक्ति कर्म और पाप से डरता नहीं है, आजकल इंसान पाप करके गर्व महसूस करता है। अनीति, अन्याय से धन कमाने वाला, पाप से पैसा कमाने वाला जीवन में कभी सूखी नहीं रह सकता है। अशुभ कर्मों का रिजल्ट किसी कारण से इस भव में नहीं मिल पाया तो आने वाले भवों में तो भुगतान ही पड़ेगा। एक मात्र धर्म ही ऐसा मार्ग है जो बुरे वक्त के समय काम आता है। जीवन में हम अच्छे कर्म करते रहे उसका फल हमे जरूर आज नहीं तो कल मिलकर ही रहेगा। कर्म चीज ऐसी है कि इसका उदय होना निश्चित है यह कब हो जावे इसका पता नहीं चल पाता है।
शनिवार को रक्षा बंधन पर्व पर 8.30 बजे से 9 बजे तक नवकार महामंत्र का सामूहिक जाप होगा उसके पश्चात प्रवचन होगा। धर्म सभा में धीरज मुनि, साध्वी कल्प लता म.सा. भी उपस्थित थे ।संघ के वरिष्ठ श्रावक राजेंद्र कुमार चौधरी ने सभी आगंतुकों का स्वागत कर आभार ज्ञापित किया।