संघर्षों से निकली प्रेरणा की किरण: अभावों से निकलकर सेवा की मिसाल बनीं ममता आचार्य

- बचपन में माता-पिता को खोया,अब समाज के बच्चों की बनीं मसीहा-
बघेरा 10 जुलाई (केकड़ी पत्रिका) बघेरा निवासी ममता आचार्य का जीवन एक सच्ची प्रेरणा है। गरीबी में पली-बढ़ी, और बचपन में ही माता-पिता का साया खो चुकी ममता ने जीवन के हर मोड़ पर संघर्षों को गले लगाते हुए खुद को स्थापित किया। शिक्षा को हथियार बनाया और राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में एक शिक्षिका के रूप में कार्यरत होकर समाज के लिए समर्पण की नई मिसाल कायम की।
विद्यालय को भेंट की 55 इंची LED टीवी
आधुनिक शिक्षा के युग में बच्चों को तकनीकी संसाधनों से जोड़ने हेतु, ममता आचार्य ने अपने विद्यालय को स्वेच्छा से 55 इंच की LED टीवी भेंट की। यह टीवी अब बच्चों की दृश्यात्मक शिक्षा में मदद करेगा, जिससे उन्हें विषयों को समझना और सीखना और भी रोचक हो जाएगा।
5 असहाय बच्चों के संपूर्ण सहयोग का संकल्प

असहाय बच्चों को लिया सहयोग में सिर्फ टीवी ही नहीं, ममता आचार्य ने समाज के प्रति अपनी संवेदनशीलता दिखाते हुए विद्यालय में पढ़ने वाले 5 असहाय बच्चों के संपूर्ण सहयोग का संकल्प लिया है। यह सहयोग केवल शैक्षणिक नहीं, बल्कि उनके वस्त्र, किताबें, जूते, बैग और आवश्यकताओं तक विस्तृत रहेगा।
समर्पण देख भावुक हुए ग्रामवासी इस प्रेरणादायक कार्य को देखकर ग्रामवासियों में हर्ष और गौरव की लहर है। शिक्षा प्रेमी कृष्ण गोपाल कालेड़ा सहित अन्य गणमान्यजनों ने ममता आचार्य के इस कार्य को सराहा और उन्हें समाज के लिए “जीती-जागती प्रेरणा” बताया।
ममता का संदेश – ‘जो मैंने झेला, वो और कोई न झेले’ममता आचार्य कहती हैं – “मैं जानती हूं कि गरीबी में और बिना मां-बाप के कैसे जीवन चलता है। मैंने जो कष्ट सहे, कोशिश है कि कोई और बच्चा वह पीड़ा न सहे।” उनके ये शब्द आज पूरे विद्यालय परिवार में चर्चा का विषय हैं।
- बघेरा से ललित नामा की रिपोर्ट